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रांची

आयुध कारखानों में निगमीकरण के रास्ते निजीकरण देश के लिए घातक : ट्रेड यूनियन

हिन्दुस्तान टीम,रांचीPublished By: Newswrap
Fri, 23 Jul 2021 09:30 PM
आयुध कारखानों में निगमीकरण के रास्ते निजीकरण देश के लिए घातक : ट्रेड यूनियन

रांची। हिन्दुस्तान ब्यूरो

ट्रेड यूनियनों ने भारत सरकार पर नागरिक रक्षा उत्पादन का निगमीकरण के रास्ते आयुध कारखानों का निजीकरण को देश के लिए घातक बताया है। विरोध कर रहे कामगारों का दमन करने के लिए आवश्यक प्रतिरक्षा सेवा अध्यादेश (इडीएसओ) लागू किए जाने के खिलाफ शुक्रवार को देशव्यापी विरोध दिवस झारखंड में भी आयोजित किया। इसमें सीटू, एक्टू, एटक, इंटक, एचएमएस और एआईयुटीयुसी समेत विभिन्न श्रमिक फेडरेशनों ने भी हिस्सा लिया।

ट्रेड यूनियनों की ओर से कहा गया कि अब तक उनके राज्य मुख्यालयों को मिली सूचना के अनुसार झारखंड में 400 से ज्यादा औद्योगिक और सरकारी संस्थानों जिनमें कोयला, इस्पात, बैंक, बीमा, राज्य व केंद्र सरकार के दफ्तरों, आंगनवाड़ी केंद्रों और विभिन्न कल-कारखानों के कार्य स्थलों पर मजदूरों - कर्मचारियों ने कोविड -19 के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए विरोध दिवस मनाया। राजधानी रांची के अलबर्ट एक्का चौक, मेन रोड स्थित बेफी कार्यालय के समक्ष कार्यक्रम आयोजित किया गया। एक्टू से जुडे मजदूरों ने अलबर्ट एक्का चौक पर विरोध प्रदर्शन किया जबकि सीटू ने बेफी कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया।

एक्टू के प्रदेश महासचिव शुभेंदू सेन ने कहा आयुध कारखानों में निगमीकरण के रास्ते निजीकरण देश के लिए घातक साबित होगा। अपने जायज मांगों को लेकर डिफेंस के कर्मचारी हड़ताल पर हैं। मजदूरों से वार्ता करने की बजाय अनिवार्य सुरक्षा सेवा अध्यादेश लाना ट्रेड यूनियन अधिकारों का उल्लंघन है। निजी कंपनियों के बजाय केद्र सरकार देश के मजदूरों की चिंता करें अन्यथा मजदूरों के विरोध से बुरे दिन देखने होंगे।

सीटू के राज्य महासचिव प्रकाश विप्लव ने कहा कि में आयुध निर्माण बोर्ड के तहत संचालित 44 आयुध कारखानों के निजीकरण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए गलत निर्णय लिया है। रक्षा उत्पादन कर्मचारियों के सभी संघ लंबे समय से कई एकजुट आंदोलनों के माध्यम से सरकार के इस तरह के इस कदम का पुरजोर विरोध कर रहे हैं और आयुध कारखानों के नेटवर्क को निगमित करने का सरकार का यह हालिया निर्णय रक्षा के संयुक्त मंच को अक्टूबर 2020 में सरकार द्वारा कर्मचारी संघो को दिए गए आश्वासन का पूरी तरह उल्लंघन है।

बैंक यूनियन बेफी के अध्यक्ष एमएल सिंह, एक्टू के भुवनेश्वर केवट, मजदूर नेता पुष्कर महतो, भीम साहू, एनामुल हक, मनोज पासवान दिवाकर साहू सीटू के अनिर्वान बोस, कनक रंजन, विजय वर्मा और सुमंत कुमार साहू समेत दर्जनों लोग मौजूद रहे।

प्रकाश विप्लव, भुवनेश्वर केवट द्वारा संयुक्त ट्रेड युनियनों की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि 30 जून 2021 को लाया गया आवश्यक रक्षा सेवा अध्यादेश 2021 की घोषणा राष्ट्रीय हितों की रक्षा में रक्षा-उत्पादन श्रमिकों के एकजुट संघर्ष को रोकने की चाल है और पूरी तरह से निंदनीय है। सीटू एक्टू समेत सभी यूनियनों ने कहा की वह रक्षा उत्पादन श्रमिकों और उनके संघों के एकजुट संघर्षों को पूरा समर्थन करते हैं और सरकार से अध्यादेश को वापस लेने और आयुध कारखानों के निगमीकरण के कदम से बचने की मांग करते हैं।

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