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रांची

नाबालिग का बयान दर्ज होने पर आरोपी पर पोस्को एक्ट लगना तय

हिन्दुस्तान टीम,रांचीPublished By: Newswrap
Thu, 17 Jun 2021 08:20 PM
नाबालिग का बयान दर्ज होने पर आरोपी पर पोस्को एक्ट लगना तय

काउंसिलिंग हुई ::::::::::::::::

बच्ची का दर्ज नहीं हो पाया बयान, पीड़िता की मानसिक स्थिति में अभी तक सुधार नहीं

विशेषज्ञ टीम के द्वारा पीड़िता की गई काउंसलिंग, चुटिया थाना करता रहा आदेश का इंतजार

रांची। संवाददाता

रेलवे के गेस्ट हाउस में आदिवासी नाबालिग के साथ यौन हिंसा मामले में गुरुवार को भी प्रक्रिया जारी रही। बालाश्रय में बाल कल्याण समिति रांची के अलावा विशेषज्ञ टीम ने बच्ची की काउंसलिंग की, जिसमें पाया गया कि बच्ची की मानसिक स्थिति में सुधार नहीं हो पाया है। सूत्रों के अनुसार बच्ची अभी भी डरी-सहमी हुई है। इसलिए काउंसलर की टीम ने स्थिति को भांपते हुए बच्ची का बयान दर्ज नहीं किया। इस वजह से बालश्रम करवाने वाले रेलवे के उप मुख्य सुरक्षा आयुक्त और यौन हिंसा का आरोपी आरपीएफ जवान पर घटना के खुलासा होने के चौथे दिन बाद भी प्राथमिकी दर्ज नहीं हो पाई।

पूरे दिन चुटिया थाना सीडब्ल्यूसी के द्वारा की जा रही काउंसलिंग और उसके बाद दर्ज होने वाले बयान के उपरांत मिलने वाले निर्देश का इंतजार करता रहा। सीडब्ल्यूसी वर्तमान में हर पहलुओं पर जांच कर रही है। उसका मूल उद्देश्य है घटना की सच्चाई को सामने लाना। घटना में और भी कोई संदिग्ध आरोपी है तो उसकी भी खोज की जाएगी। इसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया होगी। बाल अधिकार संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार इस मामले में किसी भी हालत में आरोपी पर पोस्को एक्ट की धारा लगना तय है। यदि बयान दर्ज हो जाता है तो उप मुख्य सुरक्षा आयुक्त पर बालश्रम, बाल मजदूरी और एंटी ह्यमून ट्रैफिकिंग का मामला दर्ज हो सकता है। इसके अलावा दुष्कर्म की पुष्टि होने पर आरोपी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 375, धारा 376 लगाई जाएगी। जिसमें आरोपी को जमानत तक नहीं मिलेगी। इसके अलावा यदि नाबालिग की लोक लज्जा भंग करने की बात सामने आती है तो आइपीसी की धारा 354 भी लगाई जाएगी। बच्ची का मामला होने के कारण हर परिस्थिति में पोस्को एक्ट के अलावा जेजे एक्ट की धारा 75 लगायी जाएगी। जिसमें आरोपी के लिए भविष्य में मुश्किल हो जाएगी।

पीड़िता के पक्ष में क्या हो सकता है

आरोप सिद्ध होने पर संबंधित पदाधिकारी-कर्मचारी को श्रमिक कार्य करवाने को लेकर मुआवजा देना होगा। साथ ही सरकार की ओर से भी मुआवजा राशि का प्रावधान है। इसके अलावा नाबालिग के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार की कई योजना से उसे या उसके परिवार को जोड़ा जाएगा।

अभी तक चाइल्ड लेबर का मामला दर्ज न होना दुखद

रांची। झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पूर्व अध्यक्ष आरती कुजूर ने कहा कि ये तो अभी तक स्पष्ट हो गया है कि नाबालिग बच्ची को बाल श्रमिक के रूप में रखा गया था। घटना के इतने दिन हो गए हैं, पर अभी तक चाइल्ड लेबर का मामला तक दर्ज नहीं किया गया है, यह दुखद है। वहीं, दूसरी ओर केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की, महासचिव संतोष तिर्की, विधिक सलाहकार किशोर लोहरा, संजय लोहरा व प्रकाश हंस दिन भर पूरे मामले से अधिकारियों से अवगत होते रहे और प्रक्रिया कहां तक पहुंची, इसकी जानकारी लेते रहे।

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