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बोले रांची : 500 साल की आस्था पर संकट संगम में गिरता है नाला का पानी

बोले रांची : 500 साल की आस्था पर संकट संगम में गिरता है नाला का पानी

संक्षेप: रांची के इक्कीसो महादेव धाम की पवित्रता और पहचान खतरे में है। स्वर्णरेखा और हरमू नदी का प्रदूषित पानी श्रद्धालुओं को दूर भगा रहा है। सरकार की सफाई योजना विफल रही है, जिससे यहाँ धार्मिक पर्यटन की संभावनाएँ भी प्रभावित हो रही हैं। स्थानीय लोग प्रशासन से सुधारीकरण की मांग कर रहे हैं।

Wed, 5 Nov 2025 02:27 AMNewswrap हिन्दुस्तान, रांची
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रांची, संवाददाता। राजधानी के चुटिया स्थित स्वर्णरेखा और हरमू नदी के संगम स्थल पर स्थित श्रीश्री प्राचीन इक्कीसो महादेव धाम आज अपनी पहचान और पवित्रता दोनों खोने के कगार पर है। हिन्दुस्तान के बोले रांची में स्थानीय और पूजा समिति के लोगों ने कहा कि पत्थरों पर खुद से उकरे शिवलिंग नागवंशी आस्था की ऐतिहासिकता की गवाही देती है। स्थानियों ने बताया कि यह धाम लगभग 500 वर्ष पुराना है और नागवंशी शासन काल में इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यधिक था। कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहां लाखों श्रद्धालु स्नान और पूजा के लिए आते हैं। श्रद्धालु दूर-दूर से यहां आकर भगवान इक्कीसो महादेव के दर्शन करते हैं।

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पहले यहां का वातावरण अत्यंत स्वच्छ और निर्मल था। नदी का पानी इतना साफ था कि ग्रामीण और स्थानीय लोग इसे पीने योग्य मानते थे। लेकिन, बीते दो दशकों में इस धाम की स्थिति पूरी तरह बदल गई है। अब स्वर्णरेखा नदी का पानी इतना प्रदूषित हो गया है कि इसके किनारे खड़ा रहना भी मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों ने कहा कि हरमू नदी के जरिए शहर का गंदा नाला और सीवरेज का पानी सीधे स्वर्णरेखा में गिर रहा है। इसके कारण पानी में बदबू फैल रही है और जलीय जीवन भी बुरी तरह प्रभावित हो गया है। समिति के सदस्यों ने बताया कि पहले संगम के पास स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती थी, लेकिन अब प्रदूषण के कारण लोग दूरी बना रहे हैं। विफल योजना और ठप प्लांट : हरमू नदी की सफाई के लिए सरकार ने करीब 100 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत की थी। इसके तहत ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना की गई थी, ताकि सीवरेज का पानी शुद्ध कर स्वर्णरेखा में प्रवाहित किया जा सके। लेकिन, अफसोस वर्षों बीत जाने के बावजूद इस योजना की राशि तो खर्च हो गई, लेकिन पानी और गंदा होता चला गया। योजना का प्लांट शुरू ही नहीं हो पाया और नालों का गंदा पानी आज भी सीधा नदी में गिर रहा है। श्रद्धालु और स्थानीय लोग चिंतित : स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन और नगर निगम की अनदेखी के कारण इस धार्मिक स्थल की सूरत बिगड़ती जा रही है। श्रद्धालुओं ने कहा कि इक्कीसो महादेव धाम धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला है। आज यहां बदबू और कचरे का अंबार लगा है। नाला का पानी सीधे संगम में गिरता है, जिससे पूजा-अर्चना में बाधा होती है। वहीं] पूजा समिति के सदस्यों ने कहा कि हमने कई बार प्रशासन को लिखित आवेदन दिए हैं कि मंदिर परिसर से लेकर चुटिया पुल तक नदी की सफाई कराई जाए, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पर्यटन की संभावना पर ग्रहण : स्थानीयों का मानना है कि अगर प्रशासनिक स्तर पर ध्यान दिया जाए तो इक्कीसो महादेव धाम न केवल एक धार्मिक केंद्र, बल्कि एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी बन सकता है। यहां प्राचीन चट्टानों पर उकेरे गए शिवलिंग और मंदिर इतिहास और संस्कृति के गहरे संकेत देते हैं। आसपास के क्षेत्र का सौंदर्यीकरण, घाटों का पुनर्निर्माण और हरमू नदी के सीवरेज को डायवर्ट करने से यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। लोगों ने कहा कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को शुरू कर यहां छोटे चेक डैम बनाने चाहिए। सीवरेज लाइन को अलग करना चाहिए। कार्तिक पूर्णिमा मेला उपेक्षित नगर निगम व्यवस्था कराए हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर इक्कीसो महादेव धाम में लाखों श्रद्धालु स्नान, पूजा और दर्शन के लिए पहुंचते हैं। लेकिन, इस वर्ष नगर निगम की तैयारी पूरी तरह नाकाफी दिखाई दे रही है। न तो घाटों पर पर्याप्त लाइटिंग की व्यवस्था की गई है, न ही श्रद्धालुओं के लिए चेंजिंग रूम बनाए गए हैं। समिति ने निगम से अस्थायी लाइट, बांस-बैरिकेड और मोबाइल शौचालय लगाने की मांग की है। रांची में नदियों के इस संगम को प्रशासन संरक्षण की पहल करे स्वर्णरेखा नदी के प्रदूषित जल ने कार्तिक पूर्णिमा मेले की पवित्रता को प्रभावित कर दिया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि नदी में नहाने की तो बात दूर, अब किनारे खड़ा रहना भी मुश्किल हो गया है। हरमू नदी से होकर आने वाला सीवरेज सीधे स्वर्णरेखा में मिल रहा है, जिससे पानी काला और बदबूदार हो गया है। लोगों ने कहा कि रांची के इस संगम को संरक्षित करने के लिए प्रशासन पहल करे। शाम में धाम के पास असामाजिक तत्वों का लगा रहता है अड्डा इक्कीसो महादेव धाम का परिसर शाम ढलते ही असामाजिक तत्वों का अड्डा बन जाता है। शराब पीने और नशे की गतिविधियां लगातार बढ़ रही है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि मंदिर के आसपास कई जगहों पर कचरा और शराब की बोतलें पड़ी रहती हैं, जिससे स्थल की गरिमा को ठेस पहुंच रही है। पूजा समिति ने प्रशासन से मंदिर क्षेत्र में नियमित पुलिस गश्ती बढ़ाने की मांग की है। सौंदर्यीकरण पर रांची नगर निगम ध्यान दे इक्कीसो महादेव मंदिर तक जाने वाले मुख्य मार्ग के किनारे ही श्मशान घाट स्थित है। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर जाने का रास्ता पवित्र स्थल की भावना के अनुरूप नहीं लगता, क्योंकि हर दिन यहां दाह-संस्कार होते हैं। इससे क्षेत्र में धुआं और दुर्गंध फैलती है। तीर्थयात्री असहज महसूस करते हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि नगर निगम इस श्मशान घाट को नदी के दूसरे किनारे स्थानांतरित करे, ताकि मंदिर जाने वालों को कोई असुविधा न हो। लोग चाहते हैं कि श्मशान घाट का आधुनिकीकरण और पुनर्स्थापन किया जाए, ताकि धार्मिक आस्था और सामाजिक मर्यादा दोनों का सम्मान बना रहे। उनका कहना है निगम की पहल पर यह कार्य हो सकता है। ऐतिहासिक स्थल को बचाएं इक्कीसो महादेव धाम हमारी आस्था का केंद्र है, लेकिन स्वर्णरेखा और हरमू का दूषित पानी इसे निगल रहा है। 500 साल पुराने शिवलिंग बदबूदार कीचड़ में डूबे हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालु आते थे, अब बदबू के कारण लोग कम आते हैं। सरकारी तुरंत सफाई, डायवर्जन और सौंदर्यीकरण की पहल करे। बंद प्लांट को शुरू करे। -मनोज कुमार महतो पहले संगम का पानी इतना निर्मल था कि बच्चे खेलते थे, आज सीवर की बदबू से सांस लेना मुश्किल है। मंदिर के घाट टूटे पड़े हैं। कचरा पानी में तैरता है। कार्तिक स्नान अब अभिशाप बन गया है। सरकार ने हरमू नदी को साफ करने के लिए प्लांट बनाया, पर चालू नहीं किया। हम मांग करते हैं कि हरमू का नाला अलग करो, घाट बनाओ और धाम बचाओ। -छत्रधारी महतो 100 करोड़ खर्च हुआ था पानी साफ करने को, पर गंदा होता चला गया नागवंशी काल का स्वर्णरेखा धाम झारखंड की सांस्कृतिक धरोहर है। प्रदूषण ने पानी को गंदा कर दिया है, कचरे का ढेर बना दिया। -काशीनाथ पांडे 100 करोड़ की योजना बेकार गई, प्लांट बंद पड़ा है। पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, बस सौंदर्यीकरण और सफाई चाहिए। -गौतम देव धाम के रास्ते में श्मशान घाट पड़ता है, जिससे लोग असहज महसूस करते हैं। कई बार वहां से धुआं उठता रहता है। इसे शिफ्ट किया जाए। -राजदीप महतो पांच सौ साल से यह धाम श्रद्धालुओं का तीर्थ रहा है। पहले पानी पीने लायक था, अब बदबूदार हरमू का सीवर सीधे स्वर्णरेखा में गिरता है। -मदन केशरी शाम को असामाजिक तत्वों की भीड़ बढ़ जाती है। पुलिस को इस क्षेत्र में नियमित गश्ती करनी चाहिए। सुरक्षित माहौल में श्रद्धालु आएंगे। -नंद किशोर पहले लाखों श्रद्धालु स्नान करते थे, आज दूरी बनाते हैं। ट्रीटमेंट प्लांट बनाकर पैसा लुटाया, चालू नहीं हुआ। धाम को टूरिज्म हब बनाएं। -कृष्णा शर्मा कार्तिक पूर्णिमा पर इस धाम में लाखों श्रद्धालु आते हैं, लेकिन नगर निगम की तैयारी शर्मनाक है। घाटों पर चेंजिंग रूम नहीं बना है। -वरुण कुमार वर्मा चेक डैम बने, सीवरेज डायवर्ट हो और धाम को हेरिटेज साइट घोषित किया जाए। प्रशासन जागे, वरना इतिहास मिट जाएगा। -मुन्ना कुमार