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खूंटी में जारी है अफीम के खिलाफ पुलिस का अभियान

खूंटी जिले की पुलिस अफीम के खिलाफ नवंबर 2021 से अब तक लगातार अभियान चला रही है। पुलिस ने जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में कुल 948.86 एकड़ में लगे...

खूंटी में जारी है अफीम के खिलाफ पुलिस का अभियान
Newswrapहिन्दुस्तान टीम,रांचीMon, 14 Mar 2022 03:50 AM
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खूंटी। संवाददाता

खूंटी जिले की पुलिस अफीम के खिलाफ नवंबर 2021 से अब तक लगातार अभियान चला रही है। पुलिस ने जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में कुल 948.86 एकड़ में लगे अफीम की फसलों को नष्ट कर चुकी है। इसके साथ ही 15 लोगों की गिरफ्तारी और अफीम की बरामदगी भी की गई है।

रविवार को भी पुलिस का अफीम के खिलाफ अभियान जारी रखा। इस दौरान एक साथ तीन थाना क्षेत्रों के तीन गांवों में अभियान चलाकर कुल 22. 40 एकड़ में लगे अफीम की फसलों को नष्ट कर दिया गया। जिसमें खूंटी थाना क्षेत्र के चामडीह में नौ एकड़, अड़की थाना क्षेत्र के कंडेर गांव में साढ़े सात एकड़ और मारंगहादा थाना क्षेत्र के गटिगड़ा गांव में 5.90 एकड़ में लगे अफीम की फसलों को पुलिस ने नष्ट किया है।

अफीम के खिलाफ 2017 से शुरू हुई कार्रवाई : इसके खिलाफ पुलिस ने वर्ष 2007 में तत्कालीन एसपी प्रभात कुमार ने जागरुकता अभियान शुरू किया, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। नतीजा यह हुआ कि अफीम की खेती लोग बेखौफ होकर करते रहे। 12 साल बाद वर्ष 2017 में पहली बार तत्कालीन एसपी अश्विनी कुमार सिन्हा के द्वारा अफीम की फसलों को नष्ट करने का अभियान शुरू हुआ। वर्ष 2017 में 1150.20 एकड़, 2018 में 1144 एकड़, 2019 में 710.85, 2020 में 673.70 एकड़, 2021 में 976.89 एकड़ और 2022 में अब तक 850 एकड़ में लगी अफीम की फसलों को नष्ट किया जा चुका है। अफीम के विभिन्न मामलों को लेकर 2017 से अब तक 500 से ज्यादा लोगों की लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। जिसमें से 22 से ज्यादा लोगों को न्यायालय ने पांच से 10 साल की सजा सुनाई है। पूर्व में फार्स्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से अफीम से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाती थी।

वैकल्पिक साधन मुहैया कराने में जुटा जिला प्रशासन : जिला प्रशासन क्षेत्र के लोगों की अफीम की वैकल्पिक खेती से जोड़ने का काम कर रहा है। इस क्रम में जिले में लगभग 400 एकड़ में लेमनग्रास की खेती कराई गई है। अफीम वाले इलाके में ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी आदि की खेती पर प्रशासन का जोर है। कुछ गांवों में लोग अफीम की खेती छोड़कर वैकल्पिक खेती करने लगे हैं।

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