DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पौष मेला आज से: बिखरेगी बांग्ला साहित्य-संस्कृति की छटा

शांति निकेतन (पश्चिम बंगाल) की तर्ज पर रांची में भी तीन दिवसीय पौष मेले की शुरुआत रविवार से होने जा रही है। मेकॉन की सांस्कृतिक इकाई ‘मजलिस की ओर से पहली बार बड़े स्तर पर पौष मेले का आयोजन किया जा रहा है। इससे पहले कुछ वर्ष पूर्व छोटे पर पौष मेला का आयोजन एक बार हुआ है। मेला 19 दिसंबर (मंगलवार) तक मेकॉन कम्युनिटी हॉल में चलेगा। इसमें बांग्ला संस्कृति, साहित्य, खानपान, परिधान की छटा देखने को मिलेगी। विशेष आकर्षण होंगे बंगाल के आए कलाकार और बांग्ला बैंड, जो बंग समुदाय में खासे लोकप्रिय हैं।

कई प्रतियोगिताएं होंगी

रविवार को पौष मेले का उद्घाटन सुबह 10 बजे होगा। उद्घाटन सत्र में मजलिस के कलाकार आधे घंटे की सांस्कृतिक प्रस्तुति देंगे। सुबह 10.30 बजे से नृत्य प्रतियोगिता होगी। इसमें प्रतिभागी रवींद्र नृत्य, नजरूल या आधुनिक नृत्य पर प्रस्तुति देंगे। हर प्रस्तुति के लिए पांच मिनट का समय निर्धारित है। दोपहर 3.30 बजे से ‘जैसे चाहें, वैसे जाएं (गो एज यू लाइक) प्रतियोगिता होगी। इसमें प्रतिभागियों को अपनी पसंद के मुताबिक तय करना है कि वे किस रूप में प्रस्तुत होना चाहते हैं। यह एक तरह के फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता होगी, जिसमें सबसे नायाब रूप धरने वाले को पुरस्कृत किया जाएगा। इसके बाद पुस्कार वितरण होगा, जिसमें मजलिस की ओर से वर्षभर में आयोजित की गई प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा। शाम 7.00-7.30, बजे स्थानीय बांग्ला बैंड ‘बिहान की प्रस्तुति होगी।

जोगा खेपा, तीर्थो और चंद्रबिंदु का लाइव परफॉर्मेंस

पौष मेला का मुख्य आकर्षण होंगे बंगाल से जुटे कलाकार। मेला के पहले दिन रविवार को बोलपुर का बाउल संगीत दल- ‘जोगा खेपा एंड टीम की शाम 7.30 से प्रस्तुति होगी। सोमवार को शाम 7.00 बजे से जी बांग्ला सारेगामा से चर्चित हुए गायक तीर्थो बांग्ला गीतों पर संगीतप्रेमियों को झुमाएंगे। समापन के दिन मंगलवार को बांग्ला बैंड चंद्रबिंदु की प्रस्तुति विशेष आर्कषण होगी। चंद्रबिंदु की लाइव परफॉर्मेंस देखने के लिए एंट्री पास जरूरी है। अन्य सभी प्रस्तुतियां बिना किसी एंट्री पास के देखी जा सकती हैं।

पारंपरिक बंगाली मिठाइयां

मेला परिसर (मेकॉन कम्युनिटी हॉल) में बांग्ला खान-पान, खासकर मिठाइयों, परिधानों, साहित्य, गिफ्ट आइटम आदि का स्टॉल लगाया जाएगा। बंगाली मिठाइयां विशेष आकर्षण होंगी। तरह-तरह के पीठे, मालपुआ, पाटीशप्टा, नाड़ू (नारियल के लड्डू), पायस के अलावा अन्य बंगाली मिठाइयां होंगी।

गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की परिकल्पना ‘पौष मेला

पौष मेला की परिकल्पना विश्वकवि गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर ने की थी। वह बांग्ला कैंलेंडर के आधार पर पौष माह की 7,8,9 तिथी को पौष मेला आयोजित करते थे। यह परंपरा शांति निकेतन में आजभी जारी है। मजलिस ने इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए रांची में पौष माह की 1,2,3 (17-18 दिसंबर) तिथि को पौष मेला का आयोजन किया है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:paush mela to begin from today