DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   झारखंड  ›  रांची  ›  पड़ोसी राज्यों में मिले ब्लैक फंगस के मरीज भी आ रहे रिम्स, रिम्स के ओल्ड ट्रामा सेंटर और डेंगू वार्ड में मरीजों को रखा गया है

रांचीपड़ोसी राज्यों में मिले ब्लैक फंगस के मरीज भी आ रहे रिम्स, रिम्स के ओल्ड ट्रामा सेंटर और डेंगू वार्ड में मरीजों को रखा गया है

हिन्दुस्तान टीम,रांचीPublished By: Newswrap
Fri, 11 Jun 2021 03:10 AM
पड़ोसी राज्यों में मिले ब्लैक फंगस के मरीज भी आ रहे रिम्स, रिम्स के ओल्ड ट्रामा सेंटर और डेंगू वार्ड में मरीजों को रखा गया है

रांची। संवाददाता

राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में ब्लैक फंगस के 31 मरीज भर्ती हैं। रिम्स में ओल्ड ट्रॉमा सेंटर और डेंगू वार्ड में ब्लैक फंगस के मरीजों को रखा गया है। रिम्स में मरीजों को बेहतर इलाज दी जा रही है, इस कारण राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों के अलावा पड़ोसी राज्य के सीमावर्ती इलाकों के मेडिकल कॉलेज से भी मरीजों को रिम्स रेफर किया जा रहा है। रिम्स में गया मेडिकल कॉलेज बिहार और वुडलैंड हॉस्पिटल वर्धमान वेस्ट बंगाल के भी मरीज रिम्स रेफर किए गए हैं, जहां उनका इलाज चल रहा है। इनके अलावा एमजीएम जमशेदपुर और एसएनएमसीएच धनबाद से भी ब्लैक फंगस के मरीजों को रिम्स रेफर किया गया है।

छह मरीजों को छोड़ सभी मरीज किये गए हैं रेफर

रिम्स में कुल 31 मरीज भर्ती हैं। इसमें 6 मरीज ही खुद से रिम्स में लक्षण के साथ पहुंचे थे, जिन्हें भर्ती कर लिया गया। इनके अलावा अन्य 25 मरीज किसी न किसी अस्पताल से रेफर ही किए गए हैं। इसमें शहर के बड़े निजी अस्पताल के भी मरीज हैं। वहीं टीएमएच जमशेदपुर, हजारीबाग के निजी अस्पताल के भी मरीज हैं। बता दें कि निजी अस्पतालों में इलाज बहुत महंगा होने के कारण सामान्य और मिडिल क्लास के मरीज सीधा रिम्स ही आना चाह रहे हैं।

निजी अस्पताल में इलाज बहुत महंगा

ब्लैक फंगस के इलाज में निजी अस्पतालों में कम से कम 10 लाख का खर्च आ रहा है। इस इलाज में प्रयोग होने वाली दवा एम्फोथेरेसिन-बी बहुत महंगी है। एक वायल की कीमत 6200 है। एक दिन में 6 वायल की आवश्यकता कम से कम 15 दिन तक होती है। वहीं कई बार महंगे ऑपरेशन की भी जरूरत पड़ती है। वहीं रिम्स में इलाज पूरी तरह से मुफ्त है, महामारी घोषित होने के बाद किसी भी मरीज को पैसे नहीं लग रहे हैं।

संबंधित खबरें