
पड़हा राजा सोमा हत्याकांड के साजिशकर्ता और हत्यारों की गिरफ्तारी के लिए झारखंड बंद कल
खूंटी में राजा सोमा मुंडा की हत्या के बाद मुख्य आरोपी और शूटरों की गिरफ्तारी न होने से आदिवासी समाज में आक्रोश है। आदिवासी समन्वय समिति ने 17 जनवरी को झारखंड बंद का आह्वान किया है। समिति ने पुलिस से मुख्य दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है।
खूंटी, संवाददाता। एदेल संगा पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या के आठ दिन बाद भी मुख्य साजिशकर्ता और शूटरों की गिरफ्तारी नहीं होने से आदिवासी समाज में आक्रोश है। इसके विरोध में आदिवासी समन्वय समिति के आह्वान पर शनिवार को झारखंड बंद बुलाया गया है। बंद की घोषणा गुरुवार को करम अखड़ा में आयोजित प्रेसवार्ता में की गई। आदिवासी समन्वय समिति के अध्यक्ष चंद्रप्रभात मुंडा ने बताया कि बंद की पूर्व संध्या 16 जनवरी को और 17 जनवरी की शाम पांच बजे करम अखड़ा से नेताजी चौक तक मशाल जुलूस निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस ने 72 घंटे में मुख्य साजिशकर्ता और हत्यारों को गिरफ्तार करने का वादा किया था, लेकिन आठ दिन बाद भी अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं।
पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार कर मामले को लगभग सुलझा हुआ मान लिया है, जबकि वास्तविक दोषी अब भी कानून की पकड़ से बाहर हैं। उन्होंने मांग की है कि जो लोग वास्तव में इस हत्याकांड में शामिल हैं, उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाए और निर्दोष लोगों को परेशान नहीं किया जाए। चंद्रप्रभात मुंडा ने कहा कि सोमा मुंडा राजनीति से ऊपर उठकर समाज के हित में कार्य करनेवाले व्यक्ति थे। उनकी हत्या से पूरे आदिवासी समाज को गहरा आघात पहुंचा है। आठ जनवरी को हुए खूंटी बंद के दौरान डीसी के माध्यम से मुख्यमंत्री को नौ सूत्री मांग पत्र सौंपा गया था, लेकिन अब तक किसी भी मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं आदिवासी समन्वय समिति के केंद्रीय संयोजक मार्शल बारला ने कहा कि पुलिस ने इस मामले को सुलझाने के लिए 72 घंटे का समय मांगा था। इसके तहत 25 से अधिक आदिवासी संगठनों के आह्वान पर 17 जनवरी को झारखंड बंद बुलाया गया है। यह बंद किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि न्याय की मांग और आदिवासी समाज की अस्मिता की रक्षा के लिए किया जा रहा है। मार्शल बारला ने कहा कि बंद के दौरान स्कूलों, अस्पतालों और आवश्यक सेवाओं को इससे मुक्त रखा जाएगा, ताकि आम जनजीवन पर अनावश्यक असर न पड़े। प्रेसवार्ता में संयोजक दुर्गावती ओडेया, महादेव मुंडा, जॉनसन होरो, अल्बर्ट होरो, चार्ल्स पाहन, बलवती भेंगरा, कलावती भेंगरा, बहा लिंडा, मोदेस्ता तोपनो सहित बड़ी संख्या में आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

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