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ओलंपिक संघ के अध्यक्ष व अन्य के मामले में आदेश सुरक्षित

नेशनल गेम्स (2011) घोटाले के आरोपी और झारखंड ओलंपिक संघ के पूर्व महासचिव एसएम हाशमी की ओर से दायर याचिका पर गुरुवार को अवर न्यायाधीश नीरज कुमार विश्वकर्मा की अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान प्रतिवादी आरके आनंद, मधुकांत पाठक एवं अन्य ने अपना पक्ष रखा। अपनी दलीलें स्वयं के साथ-साथ अधिवक्ता से भी रखवाया। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया। आदेश शुक्रवार को सुनाया जाएगा।हाशमी ने भारतीय ओलिंपिक संघ, झारखंड ओलंपिक संघ के चुनावी प्रक्रिया एवं वार्षिक आमसभा को अवैध घोषित करने का आग्रह करते हुए 12 लोगों को प्रतिवादी बनाते हुए रांची सिविल कोर्ट में सिविल केस दायर किया है। साथ ही भारतीय ओलंपिक संघ के महासचिव राजीव माथुर की ओर से 21 जुलाई 2017 को जारी पत्र को भी अवैध घोषित करने का अनुरोध किया है। हाशमी ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि झारखंड ओलंपिक संघ के अध्यक्ष, महासचिव और कोषाध्यक्ष को संघ का कार्य करने से तत्काल प्रभाव से रोका जाए। याचिका में कहा गया है कि कई जाली और बोगस राज्य खेल संघ का नाम वोटर लिस्ट में शामिल कर लिया गया है। जिसमें झारखंड फुटबॉल संघ, झारखंड हॉकी संघ, झारखंड आइस स्केटिंग संघ, झारखंड स्क्वाश रैकेट संघ शामिल है। हाशमी ने अपने आवेदन में यह भी कहा है कि मतदाता सूची को अवैध घोषित कर उसे निरस्त किया जाए और नई मतदाता सूची तैयार करने का आदेश दिया जाए। प्रतिवादी कौन-कौन हाशमी ने सिविल कोर्ट में सिविल केस दर्ज करवाया है। जिसमें भारतीय ओलिंपिक संघ के अध्यक्ष एन रामचंद्रन, महासचिव राजीव माथुर, कोषाध्यक्ष अनिल खन्ना, झारखंड ओलंपिक संघ के नव निर्वाचति अध्यक्ष आरके आनंद, महासचिव विशाल कुमार शर्मा, देवेन्द्र नाथ दुबे, सीके वाल्सन, एसके मेंदीरत्त और मधुकांत पाठक को प्रतिवादी बनाया गया है।

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  • Web Title:Orders secured in case of Olympic Association President and others