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रांचीअसमान विद्यालय व्यवस्था में ऑनलाइन पढ़ाई विद्यालय का विकल्प नहीं : स्पीकर

हिन्दुस्तान टीम,रांचीPublished By: Newswrap
Sat, 19 Sep 2020 03:03 AM
असमान विद्यालय व्यवस्था में ऑनलाइन पढ़ाई विद्यालय का विकल्प नहीं : स्पीकर

झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने मानसून सत्र की शुभकामनायें दी और कहा कि कुल तीन कार्य दिवस का यह महत्वपूर्ण सत्र कोरोना काल में किया गया है। छह माह में आर्थिक शैक्षणिक सहित अन्य गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इस शैक्षणिक सत्र में एक भी दिन स्कूल कॉलेज नहीं खुले। कुछ विद्यालयों द्वारा छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाने की व्यवस्था की गई है, लेकिन जो देश पूर्ण रूप से डिजिटल डिवाइड से ग्रसित है और जहां की विद्यालय व्यवस्था असमान है, वहां ऑनलाइन विद्यालय का विकल्प नहीं हो सकता। नाश के दुख से कभी, दबता नहीं निर्माण का सुखस्पीकर ने कहा कि लोग दिन रात कड़ी मेहनत कर इस महामारी का टीका खोजने में लगे वैज्ञानिकों को देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें गर्व है कि हमारे देश के बहुत सारे संस्थान मानव समाज की सुरक्षा करने की इस मुहिम में पूरी तत्परता से लगे हैं। खासकर डॉक्टर, पूरा मेडिकल स्टाफ, नर्स, प्रशासन, पुलिस कर्मी व सामाजिक संगठन अपनी जान की परवाह किए बिना पूरे लगन से जुटे हैं। इसपर उन्होंने हरिवंश राय बच्चन की पंक्तियों को जिक्र किया : एक चिड़िया चोंच में तिनका, लिए जो जा रही है, वह सहज में ही पवन, उंचास को नीचा दिखाती, नाश के दुख से कभी, दबता नहीं निर्माण का सुख, प्रलय की निस्तब्धता से, सृष्टि का नाम गान फिर-फिर। नीड़ का निर्माण फिर फिर, नेह का आह्वान फिर-फिर। सरकार को सहयोग करने की अपीलउन्होंने कहा कि पूरी दुनिया, देश और राज्य बुरे दौर से गुजर रहे हैं। सकल घरेलू उत्पाद में अप्रत्याशित कमी उपभोक्ता मूल्य में बेतहाशा वृद्धि और बढ़ती बेरोजगारी हमारे सामने गंभीर चुनौती और समस्या बनकर खड़ी है। उन्होंने कहा कि प्रलय के बाद नई सृष्टि के निर्माण का वक्त है। स्पीकर ने नौनिहालों को हुए पढ़ाई के नुकसान की भरपाई करने, रोजगार के नए अवसर तलाशने, दूसरों पर लोगों की निर्भरता को कम करने के लिए ठोस प्रयास करने पर जोर दिया और आशा व्यक्त की कि सभी दलगत प्रतिबद्धता से ऊपर उठ कर सरकार को सहयोग करेंगे। कहा कि मानव सभ्यता के इतिहास में बहुत बार विषम परिस्थितियां उत्पन्न हुई है, लेकिन मनुष्य बार-बार गिरकर फिर उठ खड़ा हुआ है।

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