बोले रांची: सांस लेना दूभर, गंदगी के बीच सुबह की सैर

Apr 05, 2026 01:48 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रांची
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रांची के कोकर डिस्टिलरी पुल के पास स्थित स्वामी विवेकानंद स्मृति पार्क, जो 2017 में तीन करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया था, अब प्रशासनिक उपेक्षा और रखरखाव की कमी से बदहाल स्थिति में है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पार्क में गंदगी, अतिक्रमण और असामाजिक तत्वों की बढ़ती संख्या ने इसे असुरक्षित बना दिया है।

बोले रांची: सांस लेना दूभर, गंदगी के बीच सुबह की सैर

रांची, संवाददाता। कोकर डिस्टिलरी पुल के समीप नगर निगम द्वारा संचालित स्वामी विवेकानंद स्मृति पार्क अपनी स्थापना के मूल उद्देश्यों को भूलकर आज बदहाली के आंसू रो रहा है। वर्ष 2017 में करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया यह पार्क प्रशासनिक उदासीनता और रखरखाव के अभाव में अब केवल अव्यवस्था का स्मारक बनकर रह गया है। हिन्दुस्तान के ‘बोले रांची’ कार्यक्रम के तहत जब मॉर्निंग वॉकर्स और स्थानीय निवासियों से बात की गई, तो उनकी पीड़ा और आक्रोश फूट पड़ा। उनका कहना है कि जिस स्थान को मनोरंजन और सुकुन के लिए संवारा गया था, वह आज अतिक्रमण, गंदगी और असामाजिक तत्वों का ठिकाना बन चुका है।

पार्क के अंदर बिखरा कूड़ा, जर्जर बुनियादी ढांचा और चारों ओर पसरी असुरक्षा के कारण आम नागरिक यहां आने से कतराने लगे हैं। स्वामी विवेकानंद स्मृति पार्क, कोकर जिसे स्थानीय लोगों के लिए एक सुसज्जित हरित क्षेत्र, स्वच्छ वातावरण और मनोरंजन स्थल के रूप में विकसित किया गया था आज प्रशासनिक उपेक्षा व देखरेख के अभाव में अपनी दुर्दशा पर आंसू रो रहा है। वर्ष 2017 में लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस पार्क का मुख्य उद्देश्य कोकर व आसपास के इलाकों के नागरिकों को व्यायाम, योग और सामाजिक गतिविधियों के लिए एक सुरक्षित व सुंदर स्थान उपलब्ध कराना था। आज की स्थिति इस उद्देश्य के बिल्कुल विपरीत नजर आती है। पार्क के मुख्य प्रवेश द्वार पर कदम रखते ही अव्यवस्था-गंदगी का आलम साफ दिखाई देने लगता है। नालियों का गंदा व दूषित पानी निर्बाध रूप से बहते हुए पार्क के आंतरिक हिस्सों तक पहुंच रहा है, जिससे न केवल दुर्गंध फैल रही है, बल्कि पूरे क्षेत्र का वातावरण भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो गया है। पार्क के भीतर जगह-जगह कचरे के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं, जिनकी हफ्तों तक सफाई नहीं की जाती। इसके चलते उठने वाली तीखी दुर्गंध के कारण लोग यहां रुकने और बैठने से परहेज करने लगे हैं। सबसे शर्मनाक व चिंताजनक बात यह है कि उचित निगरानी के अभाव में कुछ हिस्सों में खुले में शौच की घटनाएं भी सामने आ रही हैं, जिससे स्थिति और भी खराब हो गई है।पार्क की बाहरी व आंतरिक सुंदरता को सबसे अधिक चोट यहां के मुख्य गेट पर व्याप्त अतिक्रमण से पहुंच रही है। पार्क के मुख्य द्वार पर लगने वाला अनियंत्रित सब्जी बाजार अब एक स्थाई समस्या बन चुका है। सब्जी विक्रेता न केवल गेट के चारों ओर अपनी दुकानें सजाते हैं, बल्कि अपने मालवाहक वाहनों और ठेलों को भी पार्क परिसर के भीतर तक खड़ा कर देते हैं। इससे पार्क की गरिमा तो प्रभावित होती ही है, मॉर्निंग वॉकर्स और अन्य आम लोगों के लिए प्रवेश मार्ग पूरी तरह से बाधित हो जाता है। ‘बोले रांची’ कार्यक्रम के दौरान अपनी पीड़ा साझा करते हुए स्थानीय नागरिकों ने बताया कि कई बार जिला प्रशासन और नगर निगम से लिखित शिकायत करने के बावजूद इस अतिक्रमणकारी भीड़ पर अब तक कोई ठोस या स्थाई कार्रवाई नहीं की गई है। जैसे-जैसे शाम ढलती है, पार्क का माहौल पूरी तरह से बदल जाता है। सुरक्षा व्यवस्था की भारी कमी और खराब लाइटों के कारण शाम के बाद शराबियों, जुआरियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है। सुरक्षा का कोई पुख्ता इंतजाम न होने के कारण यह सार्वजनिक स्थल महिलाओं और बच्चों के लिए असुरक्षित बन गया है। पाथवे की हालत दयनीय: मॉर्निंग वॉकर्स के लिए विशेष रूप से बनाए गए पाथवे की हालत भी दयनीय हो चुकी है। जगह-जगह से रास्ते टूटे हुए और उखड़े हुए हैं, जिससे बुजुर्गों को चलने में काफी कठिनाई होती है और दुर्घटना की आशंका हर वक्त बनी रहती है।बच्चों के झूले जंग खाकर जर्जरसुविधाओं के नाम पर पार्क में मौजूद बुनियादी ढांचा खत्म हो चुका है। बच्चों के खेलने के लिए लगाए गए झूले जंग खाकर जर्जर हालत में हैं, जिनका उपयोग करना खतरे को आमंत्रण देने जैसा है। वहीं, पार्क परिसर में निर्मित शौचालय की स्थिति इतनी खराब है कि वह उपयोग के लायक ही नहीं बचा है। पानी और सफाई के अभाव में लोग मजबूरी में खुले का सहारा लेते हैं।स्वामी विवेकानंद के नाम का बोर्ड तक टूटा पार्क के बीचों-बीच बना तालाब, जिसे कभी आकर्षण का केंद्र होना था, आज सड़ते हुए कचरे और गंदगी का डंपिंग यार्ड बन चुका है। बदहाली में मुख्य गेट पर लगा स्वामी विवेकानंद के नाम का बोर्ड तक टूट चुका है, जो इस पार्क की मृतप्राय स्थिति की कहानी बयां करता है। मॉर्निंग वॉकर्स और प्रबुद्ध नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस ऐतिहासिक महत्व वाले स्मृति पार्क के अस्तित्व को बचाने के लिए अविलंब पुनरुद्धार कार्य शुरू किया जाए।बुनियादी सुविधाओं का अभाव, मॉर्निंग वॉकर परेशानपार्क में बनाए गए पाथवे की हालत बेहद खराब हो चुकी है। जगह-जगह रास्ते टूटे हुए हैं, जिससे सुबह टहलने आने वाले लोगों को काफी परेशानी होती है। बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक है, क्योंकि गिरने का जोखिम बना रहता है। बारिश के समय इन टूटे रास्तों में पानी भर जाता है, जिससे चलना और मुश्किल हो जाता है। नियमित मरम्मत और रखरखाव के अभाव में यह समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। मॉर्निंग वॉकर जो पहले यहां नियमित आते थे, अब अन्य स्थानों की ओर रुख कर रहे हैं। पार्क की मूल उपयोगिता को बनाए रखने के लिए पाथवे की तत्काल मरम्मत आवश्यक है। शौचालय की बदहाल स्थिति : पार्क में बने शौचालय की हालत बेहद खराब है और वह उपयोग के लायक नहीं रह गया है। अंदर गंदगी, पानी की कमी और टूट-फूट के कारण लोग इसका इस्तेमाल करने से कतराते हैं। साफ-सफाई की नियमित व्यवस्था नहीं होने से शौचालय से दुर्गंध आती रहती है, जो पूरे पार्क के वातावरण को प्रभावित करती है। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह बड़ी समस्या बन गई है। सार्वजनिक स्थान पर स्वच्छ शौचालय की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है।गंदगी और रखरखाव की भारी कमीस्वामी विवेकानंद स्मृति पार्क की सबसे बड़ी समस्या इसकी बदहाल सफाई व्यवस्था है। पार्क के भीतर नालियों का गंदा पानी बहता रहता है, जिससे पूरे परिसर में दुर्गंध फैली रहती है। नियमित सफाई नहीं होने के कारण जगह-जगह कचरे के ढेर नजर आते हैं, जो पार्क की सुंदरता को पूरी तरह नष्ट कर रहे हैं। असामाजिक तत्वों का जमावड़ाशाम होते ही पार्क असामाजिक गतिविधियों का अड्डा बन जाता है, जो स्थानीय निवासियों के लिए चिंता का विषय है। यहां शराब पीना, जुआ खेलना और मारपीट जैसी घटनाएं आम हो गई हैं। पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी के अभाव में असामाजिक तत्व बेखौफ होकर इन गतिविधियों को अंजाम देते हैं। खुले में शौच से दूषित वातावरणपार्क के मैदान में कुछ लोग खुले में शौच कर देते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में बदबू फैल जाती है। यह न केवल अस्वच्छता को बढ़ावा देता है, बल्कि पार्क के उपयोग को भी सीमित कर देता है। परिवार और बच्चे इस कारण पार्क में आने से बचते हैं। इसके लिए नियमित निगरानी और लोगों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।अतिक्रमण और अव्यवस्था पार्क के मुख्य प्रवेश द्वार और आसपास के क्षेत्र में अतिक्रमण एक बड़ी समस्या बन गई है। सब्जी विक्रेताओं द्वारा यहां अस्थायी बाजार लगा दिया गया है, जिससे आने-जाने का रास्ता बाधित हो जाता है। विक्रेता अपने मालवाहक वाहन भी पार्क के पास खड़े कर देते हैं, जिससे न केवल भीड़ बढ़ती है बल्कि पार्क का सौंदर्य भी प्रभावित होता है। अतिक्रमण के कारण पार्क अपने मूल स्वरूप को खोता जा रहा है। स्थानीय प्रशासन की ओर से इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से समस्या लगातार बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो पार्क पूरी तरह से बाजार में तब्दील हो सकता है।समस्याएं1. पार्क में गंदगी का आलम, नाली का पानी और कचरे का जमाव से बढ़ी परेशानी2. मुख्य गेट और परिसर में अतिक्रमण व सब्जी बाजार से पार्क प्रभावित3. असामाजिक तत्वों का जमावड़ा और सुरक्षा की कमी से पार्क में असुरक्षा का माहौल4. टूटा पाथवे और जर्जर झूले से मॉर्निंग वार्कस और बच्चों को होती है परेशानी5. शौचालय, पानी और सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभावसुझाव1. पार्क में नियमित सफाई और नाली व्यवस्था दुरुस्त करनी चाहिए2. अतिक्रमण हटाकर व सब्जी बाजार को शिफ्ट कर पार्क का प्रवेश मार्ग खाली कराया जाए3. सुरक्षा गार्ड, सीसीटीवी और लाइट की व्यवस्था कर सुरक्षा बढ़ाई जाए4. पाथवे, जिम उपकरण और झूलों की मरम्मत कराकर मॉर्निंग वार्कस के अनुकुल बनाया जाए5. शौचालय और पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। बताईं परेशानीइस पार्क में सुबह टहलने आता हूं, लेकिन अब यहां आना मुश्किल हो गया है। पाथवे पूरी तरह टूटा हुआ है, जिससे चलने में दिक्कत होती है और गिरने का डर बना रहता है। गंदगी इतनी है कि सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। प्रशासन को चाहिए कि यहां की सफाई और मरम्मत जल्द कराए ताकि हम लोग सुरक्षित तरीके से टहल सकें। -प्रो केबी यादवसुबह की ताजी हवा लेने के लिए पार्क आता हूं, लेकिन यहां बदबू और गंदगी का माहौल मिलता है। मैदान में लोग खुले में शौच कर देते हैं, जिससे यहां खड़ा रहना भी मुश्किल हो जाता है। सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। पार्क में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है, यहां गार्ड और सीसीटीवी की व्यवस्था होनी चाहिए। -अक्षय प्रसाद सिंह

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