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नगर निकाय चुनाव का मुद्दा नीलकंठ सिंह मुंडा ने विधानसभा में उठाया

झारखंड विधानसभा सत्र के दौरान खूंटी के विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा ने नगर निकाय चुनाव कराने से संबंधित ध्यान आकर्षण प्रस्ताव आसन्न विधानसभा अध्यक्ष के...

नगर निकाय चुनाव का मुद्दा नीलकंठ सिंह मुंडा ने विधानसभा में उठाया
हिन्दुस्तान टीम,रांचीThu, 29 Feb 2024 02:15 AM
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खूंटी, प्रतिनिधि।
झारखंड विधानसभा सत्र के दौरान खूंटी के विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा ने नगर निकाय चुनाव कराने से संबंधित ध्यान आकर्षण प्रस्ताव आसन्न विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष लाया। विधायक ने कहा कि अप्रैल 2023 में नगर निकाय का कार्यकाल समाप्त हो गया है। कार्यकाल समाप्त हो जाने की इतने दिनों के बाद भी चुनाव नहीं करना सरकार की मनसा पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है।

चुनाव नहीं होने के कारण 15वें वित्त की राशि जिससे कि स्थानीय जनप्रतिनिधि विकास उन्मुखी कार्य के लिए अपने क्षेत्र के लिए योजना का चयन करते हैं राशि प्राप्त नहीं हो रही है, जिससे विकास का कार्य कहीं ना कहीं अवरोध हुआ। विधायक ने संबंधित विभाग के मंत्री से यह जानना चाहा कि नगर निकाय का कार्यकाल पूरा हो गया है तो समय पर इसका चुनाव क्यों नहीं किया गया।

जवाब देते हुए संबंधित विभाग के मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के वाद संख्या उब्लूपीसी 980/2019 किशन राव गवली वाद में यह आदेश पारित किया गया था कि ओबीसी को निर्वाचन प्राप्ति हेतु ट्रिपल टेस्ट किया जाए इस हेतु राज्य सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग आयोग को डेडीकेटेड कमिशन के रूप में अधिसूचित किया गया है। पिछड़ा वर्ग आयोग के द्वारा रिपोर्ट प्राप्त होने पर नगरपालिका चुनाव अधिसूचित किया जाएगा।

संबंधित विभाग के मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा ने पुनःसंबंधित विभाग के मंत्री से पूछा कि सर्वोच्च न्यायालय का मामला आरक्षण से संबंधित है ना कि निर्वाचन नहीं करने से। उन्होंने कहा कि मुझे तो इस बात की जानकारी चाहिए कि चुनाव अपने निश्चित कार्यकाल पर क्यों नहीं किया गया। साथ ही साथ विधायक ने कहा कि न्यायालय के समक्ष शपथ पत्र में 6 महीने के दौरान नगर निकाय चुनाव कराने की बात वर्तमान सरकार ने की थी। इस तरह का जवाब देकर झारखंड सरकार न्यायालय एवं सदन दोनो को गुमराह करने का काम कर रही है।

विधायक ने यह भी कहा की नगर निकाय क्षेत्र में चाहे वह नगरपालिका हो नगर पंचायत हो या नगर परिषद चुने ही जनप्रतिनिधियों द्वारा योजना का चयन विकास के लिए किया जाता है। लेकिन वर्तमान परिप्रेक्ष्य में योजना चयन से लेकर आवंटन तक नगर निकाय प्रशासक द्वारा किया जा रहा है, जो कि स्थानीय प्रतिनिधियों के अधिकार का हनन है।

संबंधित विभाग के मंत्री ने पुनः दोहराया कि पिछड़ा वर्ग आयोग के रिपोर्ट आने के बाद ही चुनाव करना संभव होगा। जवाब से असंतुष्ट विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा ने कहा की जब चुनाव कराना था तो पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन में सरकार ने कितनी देरी क्यों लगाई। सदन से सही उत्तर नहीं प्राप्त होने पर विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा सरकार को यह सलाह दिया कि पंचायत चुनाव से पूर्व जो व्यवस्था लागू की गई थी उसी तरह की वैकल्पिक व्यवस्था को लागू कर पूर्व में चुने हुए प्रतिनिधियों के उसके अधिकार वापस देने चाहिए, जब तक की चुनाव ना हो इससे विकास का कार्य अविरल गति से चलता रहेगा।

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