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प्राकृतिक संसाधनों को पीढ़ियों के लिए बचा कर रखना होगा : डीके सक्सेना

हमें अपनी जरूरतों को सीमित कर सतत विकास की दिशा में बढ़ना होगा, बढ़ती आबादी की जरूरतों का बोझ प्राकृतिक संसाधनों पर पड़...

प्राकृतिक संसाधनों को पीढ़ियों के लिए बचा कर रखना होगा : डीके सक्सेना
हिन्दुस्तान टीम,रांचीThu, 07 Dec 2023 07:00 PM
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रांची। हिन्दुस्तान ब्यूरो
राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस के अवसर पर झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (जेएसपीसीबी) ने गुरुवार को पलाश सामुदायिक भवन में स्वच्छ और स्वस्थ ग्रह के लिए सतत विकास में मीडिया की भूमिका विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया। मुख्य अतिथि के रूप में डीके सक्सेना (एपीसीसीएफ) ने कहा कि सतत विकास आज की जरूरत है। प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग करते हुए इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए बचा कर रखना होगा।

जेएसपीसीबी के सदस्य सचिव वाईके दास ने कहा कि बढ़ती आबादी की जरूरतों का बोझ प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ रहा है। हमें अपनी जरूरतों को सीमित रखते हुए सतत विकास की दिशा में बढ़ना होगा। एपीसीसीएफ विश्वनाथ शाह, मनोज प्रसाद (वकील, झारखंड उच्च न्यायालय), राहुल साबू (वकील, झारखंड उच्च न्यायालय), पत्रकार मुकेश रंजन भी परिचर्चा में शामिल हुए। डीके सक्सेना ने कहा कि सतत विकास में मीडिया की अहम भूमिका होती है। सरकार की योजनाएं धरातल पर क्या प्रभाव डालेंगी या डाल रही हैं, इसकी जानकारी मीडिया से मिलती है। उन्होंने कहा कि मीडिया को चाहिए कि समय-समय पर सही डेटा, रिपोर्ट से समाज को अवगत कराए, ताकि हम सही निर्णय ले सकें और बदलाव ला सके।

विश्वनाथ शाह ने कहा कि मीडिया और सोशल मीडिया पर्यावरण जागरुकता फैलाने का अच्छा और सरल माध्यम है। मनोज प्रसाद और राहुल साबू ने पर्यावरण सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों से अवगत कराया और जन-जागरूकता, पारदर्शिता फैलाने के लिए पर्यावरण संरक्षण के सर्वोत्तम उपायों को प्रोत्साहित करने में मीडिया की अहम भूमिका बतायी। पत्रकार मुकेश रंजन ने मीडिया और सरकारी संस्थाओं की भूमिका को रेखांकित किया। परिचर्चा के उद्देश्य को जन-जन तक पहुंचाने में भूमिका निभाने की बात कही।

नदियों का पानी पीने योग्य बनाने के प्रयास सफल होंगे : वाईके दास

जेएसपीसीबी के सदस्य सचिव वाईके दास ने कहा कि दीया भी रहे और रोशनी भी रहनी चाहिए, के सिद्धांत पर विकास की परिकल्पना की जा रही है। उन्होंने कहा कि रांची में स्वर्णरेखा नदी और हरमू नदी को साफ करने के लिए विभिन्न योजनाओं का सुखद फलाफल जल्द आएगा। जल्द नदियों का पानी पीने योग्य बनाया जाएगा। उन्होंने स्वच्छ वायु, स्वस्थ भविष्य पर प्रकाश डाला और बताया कि भोपाल गैस त्रासदी में हजारों की संख्या में लोगों ने जान गंवाई थी। उस दिन 2-3 दिसंबर 1984 के दरम्यान रात को भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में जहरीली गैस का ऐसा रिसाव हुआ था कि इसके चलते हजारों लोग नींद में ही मौत के आगोश में समा गए थे। सुबह होते-होते भोपाल की सड़कें लाशों से पट गई थीं। भोपाल गैस त्रासदी की आज 38वीं बरसी है। 38 साल पहले की यह सुबह भोपाल के लिए बेहद भयानक थी। इसी कड़ी में दो दिसंबर भी किसी न किसी रूप में खास है, क्योंकि इस दिन राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाया जाता है।

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