विकसित भारत के निर्माण में महिला वैज्ञानिकों की भूमिका अहम: डॉ. प्रियांक
रांची में नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया (नासी) के झारखंड चैप्टर द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय 'विज्ञान में महिलाएं' रहा, जिसमें महिला शोधकर्ताओं के योगदान को रेखांकित किया गया। तकनीकी भ्रमण, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता और प्रेरणादायक वीडियो प्रस्तुत किया गया।

रांची, विशेष संवाददाता। नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया (नासी) के झारखंड चैप्टर ने शनिवार को बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी), मेसरा के सहयोग से राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का आयोजन किया। संस्थान के एआईसीटीई आईडिया लैब में आयोजित कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘विज्ञान में महिलाएं: विकसित भारत को गति देने वाली शक्ति’ रहा। इस संगोष्ठी के माध्यम से राष्ट्र निर्माण, प्रौद्योगिकी और नवाचार में महिला शोधकर्ताओं के योगदान को रेखांकित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महान वैज्ञानिक सर सीवी रमन के जीवन और उनकी ऐतिहासिक वैज्ञानिक उपलब्धियों पर आधारित एक प्रेरणादायक वीडियो प्रस्तुति से हुआ। इस अवसर पर विभिन्न विभागों की महिला शोधार्थियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था।
आयोजन के दौरान विज्ञान और समकालीन अनुसंधान पर आधारित एक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य भारत की समृद्ध वैज्ञानिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। मुख्य आकर्षण एआईसीटीई आईडिया लैब का तकनीकी भ्रमण रहा। यहां शोधार्थियों को उन्नत उपकरणों और प्रोटोटाइप निर्माण की आधुनिक सुविधाओं से रूबरू कराया गया। बताया गया कि प्रयोगशाला के सैद्धांतिक शोध को किस प्रकार व्यावहारिक उत्पादों और ट्रांसलेशनल तकनीकों में बदला जा सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य महिला शोधकर्ताओं को नवाचार-आधारित विकास के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. प्रियांक कुमार ने महिला वैज्ञानिकों के सशक्तीकरण पर जोर देते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन्हें आधुनिक अवसंरचना और सही मार्गदर्शन प्रदान करना अनिवार्य है। उन्होंने आह्वान किया कि शोधार्थी आईडिया लैब जैसे मंचों का उपयोग अपने विचारों को कार्यशील मॉडल में बदलने और उद्यमिता की ओर कदम बढ़ाने के लिए करें। सह-संयोजक डॉ. सुकल्याण चक्रवर्ती ने अंतर्विषयी सहयोग और व्यावहारिक प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं, नासी के सदस्य डॉ. अशोक शेरोन और डॉ. अनिमेष घोष ने शोधार्थियों से संवाद करते हुए उन्हें सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ अनुसंधान करने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रतिभागी शोधार्थियों ने लैब की अत्याधुनिक सुविधाओं की सराहना की और भविष्य में औद्योगिक व सामाजिक समस्याओं के समाधान हेतु नवाचारी तकनीकों पर कार्य करने की इच्छा व्यक्त की।
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