राज्य की किशोरियों का होगा समग्र सशक्तिकरण
जनजातीय किशोरियों के सशक्तिकरण को ‘सशक्त’ कार्यक्रम का शुभारंभ, राज्य के जनजातीय क्षेत्रों में तीन चरणों में संचालित किया जाएगा कार्यक्रम, किशोरियों क

रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि हमें केवल औपचारिकता पूरी नहीं करनी हैं, बल्कि धरातल पर ठोस परिणाम लाना है। हमें कुपोषण, कम उम्र में विवाह और खराब स्वास्थ्य चक्र को हमेशा के लिए तोड़ना है। इसके लिए सबसे पहले किशोरियों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। अभियान निदेशक सोमवार को झारखंड के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में किशोरियों के स्वास्थ्य, पोषण और समग्र सशक्तिकरण को लेकर महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ‘सशक्त’ का विधिवत शुभारंभ कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, एकजुट और पिरामल स्वास्थ्य के संयुक्त तत्वावधान में होटल बीएनआर चाणक्य में किया गया। उन्होंने कहा कि हमें किशोरियों को केवल सामान्य शिक्षा ही नहीं, बल्कि ‘रोजगार-उन्मुख शिक्षा’ और उचित पोषण प्रदान करना होगा। यदि उन्हें सही पोषण नहीं मिला, तो वे भविष्य में कमजोर बनकर रह जाएंगी। ‘सशक्त’ कार्यक्रम के तहत काउंसिलिंग, क्लिनिकल सेवाओं और कम्यूनिटी-बेस्ड पीयर एजुकेटर अप्रोच को जिला स्तर से लेकर सुदूर विलेज व फैसिलिटी लेवल तक पूरी सक्रियता से लागू किया जाएगा और इसकी नियमित समीक्षा की जाएगी। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग आयुष्मान आरोग्य मंदिर में हर महीने की 24 तारीख को एक जागरुकता कार्यक्रम उमंग आयोजित कर रहा है। जिसमें किशोर-किशोरियों को कई जरूरी जानकारी दी जा रही है।
इस अवसर पर उपस्थित विशेषज्ञ
इस अवसर पर डॉ विजय किशोर रजक, डॉ मुकेश मिश्रा, डॉ पुष्पा, डॉ कमलेश, डॉ राहुल किशोर सिंह, डॉ प्रदीप सहित स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग, पंचायती राज संस्थाओं तथा विभिन्न तकनीकी व सामाजिक विकास सहयोगी संस्थाओं के वरिष्ठ प्रतिनिधि एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
सशक्त कार्यक्रम की रणनीति
चार रणनीतिक स्तंभों पर आधारित है ‘सशक्त’
यह परियोजना पूरी तरह से एक सिस्टम-ड्रिवेन, सहयोगी और रणनीतिक दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसे मुख्य रूप से चार मजबूत स्तंभों पर केंद्रित किया गया है। पहले स्तर पर एनएचएम के तहत राज्य और जिला स्तर पर तकनीकी सहायता इकाइयों और जिला/ब्लॉक टास्क फोर्स को मजबूत किया जाएगा। दूसरे स्तम्भ में सामुदायिक सहभागी शिक्षण सत्रों के माध्यम से परिवारों, पीयर एजुकेटरों और सहिया/एएनएम के नेटवर्क को सक्रिय किया जायेगा। तीसरे में किशोरावस्था में होने वाले बदलावों को देखते हुए शिक्षा और स्वास्थ्य एवं कल्याण के माध्यम से किशोरियों में नेतृत्व क्षमता विकसित की जाएगी। चौथे में डिजिटल तकनीक, डेटा का इस्तेमाल कर रियल टाइम निगरानी, डेटा गुणवत्ता में सुधार और नीति निर्माण में सहयोग लिया जाएगा।
कार्यक्रम का चरणबद्ध कार्यान्वयन
प्रथम चरण में 5 प्राथमिकता वाले जिलों में संचालन
कार्यक्रम प्रथम चरण में झारखंड के 5 प्राथमिकता वाले जिलों (पाकुड़, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, खूंटी और गुमला) में क्रियान्वित किया जा रहा है। द्वितीय चरण में स्केल-अप के तहत झारखंड के 9 राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) का जिलों के 93 प्रखंड में विस्तार किया जाएगा। उसके बाद तृतीय चरण में पूर्ण राज्यव्यापी विस्तार होगा, जिसके तहत झारखंड के शेष 15 जिलों में कार्यक्रम का संचालन किया जाएगा।
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