सीयूजे में गणित व सांख्यिकी के व्यावहारिक अनुप्रयोग पर मंथन
रांची में केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड में गणित और सांख्यिकी पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हुआ। अंतिम दिन विशेषज्ञों ने सांख्यिकी के विभिन्न व्यावहारिक अनुप्रयोगों, जैसे कि डेटा विश्लेषण और सांख्यिकीय मॉडलिंग, पर चर्चा की। संगीत में सांख्यिकी के विश्लेषण और डेंगू रोग पर शोध प्रस्तुत किया गया।

रांची, विशेष संवाददाता। केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (सीयूजे) में गणित और सांख्यिकी के क्षेत्र में नवीनतम शोध और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन शनिवार हुआ। अंतिम दिन सी सतीश कुमार ने इंजीनियरिंग, प्रबंधन और डेटा विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में सांख्यिकी के व्यापक प्रयोग की संभावनाओं पर बात की। वहीं, वृंदावन साहू और पीयूष कांत राय ने सांख्यिकीय मॉडलिंग और डोमेन एस्टिमेशन की प्रक्रियाओं को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने बताया कि जनसंख्या के विशिष्ट उपसमूहों के लिए सटीक अनुमान निकालने में सांख्यिकी किस प्रकार निर्णायक भूमिका निभाती है। समापन सत्र में सौभिक चक्रवर्ती ने ‘सांख्यिकीय संगीतशास्त्र’ पर व्याख्यान दिया।
उन्होंने रागों और संगीत संरचना के सांख्यिकीय विश्लेषण को बताया कि संगीत में पैटर्न का वैज्ञानिक आधार होता है। हारमोनियम और पियानो के स्वर विन्यास में निहित गणितीय संरचना को उन्होंने सरल उदाहरणों से समझाया। उत्कल विश्वविद्याल के प्रफुल्ल कुमार स्वैन ने डेंगू रोग के मामलों के सांख्यिकीय विश्लेषण पर आधारित शोध प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि डेटा-आधारित मॉडलिंग से रोग के प्रसार, कारण और प्रभाव का सटीक अध्ययन कर भविष्य की रोकथाम रणनीतियां तैयार की जा सकती हैं। वहीं, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी उत्तराखंड के धर्मेंद्र त्रिपाठी ने ऑनलाइन माध्यम से गणितीय मॉडलिंग से रक्त प्रवाह के आधार पर कैंसर रोग की जटिलताओं को समझाया। सम्मेलन के संयोजक प्रो केबी पांडा समेत बड़ी संख्या में प्रतिभागी उपस्थित थे।
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