
श्रीराम राज्याभिषेक कथा में भावुक हुए भक्त
रांची में गुजराती पटेल भवन में पिछले आठ दिनों से चल रहे धार्मिक अनुष्ठानों का समापन हवन और यज्ञ के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने एक लाख चालीस हजार से अधिक बार श्री हनुमान चालीसा का पाठ किया। राज्याभिषेक प्रसंग का वर्णन करते हुए अयोध्या से आए दिलीप दास त्यागी ने भगवान श्री राम का स्वागत एवं उनकी वापसी का उल्लेख किया।
रांची, वरीय संवाददाता। गुजराती पटेल भवन में पिछले आठ दिनों से जारी धार्मिक अनुष्ठानों का समापन गुरुवार को हवन और यज्ञ के साथ हुआ। इस दौरान असंख्य श्रद्धालुओं ने मिलकर एक लाख चालीस हजार से अधिक बार श्री हनुमान चालीसा का पाठ किया। श्री राम कथा का समापन भगवान श्री रामचंद्र के राज्याभिषेक के प्रसंग के साथ हुआ। अयोध्या से पधारे दिलीप दास त्यागी ने राज्याभिषेक प्रसंग का आलोकिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान श्री राम पूरे 14 वर्ष का वनवास पूरा कर जब अयोध्या लौटे, तो वहां के निवासियों ने उनका भव्य स्वागत किया। पूरी अयोध्या को दुल्हन की तरह सजाया गया और मुनि श्री वशिष्ठ ने उनका राज्य तिलक किया।
वक्ता ने बताया कि रावण को हराकर लौटने पर श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण के स्वागत की तैयारी गुरु वशिष्ठ के आदेश पर ही शुरू हुई। सुमन बृष्टि नभ संकुल भवन चले सुखकंद... चौपाई का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि अयोध्या नगरी को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया और दीप माला करके भगवान का स्वागत किया गया, जिससे पूरी अयोध्या में उत्सव का वातावरण था। नगर के स्त्री-पुरुषों के समूह अटारियों पर चढ़कर उनके दर्शन कर रहे थे, और सभी ने मंगल के लिए बंदनवार, पताका और ध्वज लगाए थे। सवा लाख हनुमान चालीसा पाठ पूर्ण श्री नरसिंह बांध बालाजीधाम, बर्नपुर से आए संतोष भाई ने बताया कि संकट निवारण के लिए हनुमान चालीसा से उत्तम कोई पाठ नहीं हो सकता। उन्होंने नौ दिवसीय अखंड सवा लाख श्री हनुमान चालीसा पाठ का मंत्र देते हुए शिष्यों को नियमित पाठ करने के लिए प्रेरित किया। पिछले आठ दिनों में श्रद्धालुओं ने 1,40,000 से अधिक श्री हनुमान चालीसा का पाठ किया। उन्होंने बताया कि खास कर संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा... और बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होए हमारो... जैसी चौपाइयों का पाठ अत्यंत प्रभावी माना गया है, क्योंकि ये चौपाइयां हनुमान जी का स्मरण करने से सभी कष्टों और पीड़ाओं को दूर करने का मंत्र हैं। भंडारे का हुआ आयोजन इस अवसर पर आसनसोल से आए पंडित दिलीप शास्त्री ने 31 जोड़ों से हवन में मंत्रोच्चारण के साथ आहुतियां डलवाईं। सुबह सात बजे मुख्य यजमान अनिल और शोभा अग्रवाल ने अरविन्द सिंह के साथ सपत्नीक पूजा-अर्चना, पूर्णाहुति और हवन-आरती की। सभी 31 जोड़ों ने हवन में आहुति दी। गुरुवार को भंडारे का आयोजन अजय जैन, संतोष अग्रवाल, अशोक मंगल और रितेश पाण्डेय की ओर से किया गया। अंत में, मुख्य यजमान अशोक धानुका ने महाराज श्री की चरण वंदना कर उन्हें विदा किया।

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