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कविता और साहित्य के मर्म पर हुई चर्चा

साहित्यिक संस्था शब्दकार की ओर से कार्यक्रम बाअदब का आयोजन रविवार को किया गया। इसमें मुख्य वक्ता के रूप मे वरिष्ठ आलोचक व मार्क्सवादी चिंतक डॉ खगेंद्र ठाकुर मौजूद थे। उन्होंने छायावाद और मार्क्सवाद के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही, अपना संस्मरण भी साझा किया। उन्होंने कहा कि आलोचना के क्षेत्र में वह हिन्दी कहानीकार यशपाल की वजह से आए। यशपाल ने आलोचना को लेकर एक लेख लिखा था। इसके जवाब में डॉ खगेंद्र ठाकुर ने भी एक लिखा, जिसे यशपाल ने न सिर्फ अपनी पत्रिका में छापा, बल्कि इसपर बहस भी शुरू कराई। डॉ ठाकुर ने हिन्दी के विभिन्न कालखंडों की कविता यात्रा का भी इतिहास बयां किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ हरेराम त्रिपाठी चेतन, डॉ अशोक प्रियदर्शी समेत बड़ी संख्या में साहित्यकार और बुद्धिजीवी मौजूद थे। मौके पर कवि गोष्ठी भी हुई, जिसमें रचनाकारों ने अपनी कविताएं पढ़ीं। वीणा श्रीवास्तव, रेणु त्रिवेदी मिश्र, संगीता कुजारा, शिल्पी कुमारी, राजीव थेपडा मृदुल प्रिया समेत अन्य कवि व कवयित्रियों ने सम-सामयिक विषयों को अपनी कविता में उठाया।

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  • Web Title:Literary programme held