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साक्षरता पहले के मुकाबले बढ़ी है, परन्तु ज्ञान में उतना नहीं हुआ विकास : कड़िया मुंडा

प्रखंड क्षेत्र के पेरका गांव में स्थित लीड्स के प्रशिक्षण केंद्र में आदिवासी संस्कृति और शिक्षा के विकास पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि...

साक्षरता पहले के मुकाबले बढ़ी है, परन्तु ज्ञान में उतना नहीं हुआ विकास : कड़िया मुंडा
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हिन्दुस्तान टीम,रांचीSat, 22 Jun 2024 01:45 AM
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मुरहू, प्रतिनिधि। प्रखंड क्षेत्र के पेरका गांव में स्थित लीड्स के प्रशिक्षण केंद्र में आदिवासी संस्कृति और शिक्षा के विकास पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व लोकसभा उपाध्यक्ष कड़िया मुंडा शामिल हुए। परिचर्चा का आयोजन लीड्स के द्वारा किया गया। मौके पर कड़िया मुंडा ने कहा कि आज साक्षरता पहले के मुकाबले बढ़ी है, परन्तु ज्ञान में उतना विकास नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि आदिवासी संस्कृति विश्व की सबसे पुरानी संस्कृति है। आदिवासी जीवन पद्धति प्रकृति से जुड़ी हुई है और इसी पर आधारित होकर उनका जीवन चलता है। वर्तमान समय में आदिवासी संस्कृति विलुप्त होने की कगार पर है और इसका एक मुख्य कारण नशापान है।
कड़िया मुंडा ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी में नशापान का जितना प्रचलन देखा जा रहा है, उतना पहले नहीं था। युवा पीढ़ी को यह सोचना चाहिए कि हम आगे समाज को किस रूप में देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जो संस्थाएं आदिवासी क्षेत्रों में काम कर रही हैं, उन्हें भी खुल कर इस मुद्दे पर लोगों से बात करनी चाहिए। आज साक्षरता पहले के मुकाबले बढ़ी है, परन्तु ज्ञान में उतना विकास नहीं हुआ है। जरुरत अपने अन्दर ज्ञान की प्राप्ति की होनी चाहिए, ताकि समाज के विकास में सकारात्मकता लायी जा सके। आज का युग तकनीकी युग है और ऐसे में नई और पुरानी संस्कृति में तालमेल बनाकर आगे बढ़ना होगा। ग्राम सभाएं, पंचायत और अभिभावकों की समिति को शिक्षा के स्तर को आगे बढ़ाने के बारे में कार्य करना होगा। जो स्वयंसेवी संस्थायें आदिवासी क्षेत्रों में काम कर रही हैं उन्हें समस्याओं की सही जानकारी लेनी होगी, ताकि समस्याओं का हल करने का सही उपाय वे कर सकें। यदि ऐसा होगा तभी आदिवासी क्षेत्र के लोगों को इसका सही फायदा मिल पायेगा।

विकास भारती के निखिलेश मैती ने कहा कि आदिवासी संस्कृति के रीति रिवाजों में ज्ञान-विज्ञान समाहित है। आदिवासी समाज की कृषि और कला की पारंपरिक विधियों से भी काफी कुछ सीखा जा सकता है। वाटर संस्था की रेखा ने बताया कि उनकी संस्था जल संरक्षण पर काम कर रही है और मुरहू से ही संस्था ने कार्य शुरू की थी। जल संरक्षण के लिए पेड़-पौधे और जंगल काफी महत्वपूर्ण हैं। कार्यक्रम में प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन से सुनील वर्मा, वाटर संस्था से रेखा, विकास भारती से निखिलेश मैती, मोबाइल क्रेचेस से दीपा कुमारी शामिल हुईं। परिचर्चा में पंचायत प्रतिनिधि, महिला मंडल की दीदियां व आंगनबाड़ी सेविकाएं शामिल हुईं।

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