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रांचीवकीलों ने बार कौंसिल से मांगा आर्थिक सहयोग

हिन्दुस्तान टीम,रांचीPublished By: Newswrap
Mon, 26 Apr 2021 07:12 PM
वकीलों ने बार कौंसिल से मांगा आर्थिक सहयोग

रांची। प्रमुख संवाददाता

बार कौंसिल के दो मई तक किसी भी अदालती कार्य नहीं करने के आदेश के बाद वकीलों की परेशानी बढ़ गई है। पिछले एक सप्ताह से वकीलों ने काम नहीं किया और दो मई तक भी नहीं करेंगे। इससे उनके सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। पिछले साल लॉकडाउन के बाद फिजिकल कोर्ट शुरू हुए कुछ ही दिन हुए थे। कि फिर से कोर्ट बंद हो गए। इससे एक बार फिर उनके सामने कोरोना संकट गहरा गया है।

वकीलों का कहना है कि बार कौंसिल ने एहतियात के तौर पर यह निर्णय लिया है, लेकिन उन्हें वकीलों को आर्थिक सहयोग करने पर भी विचार करना चाहिए। यदि संक्रमण की रफ्तार बढ़ती रही और फिजिकल कोर्ट शुरू नहीं हुए, तो इस बार पेशा बदलना मजबूरी हो जाएगी। वकीलों को अभी तक सरकार की ओर से चलने वाली सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। इस कारण उन्हें किसी प्रकार की मदद नहीं मिल पाती है। ऐसे में बार कौंसिल और सरकार को वकीलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा करनी चाहिए।

मुवक्किलों को भी परेशानी:

बार कौंसिल के निर्णय के बाद से कई मुवक्किलों को परेशानी भी हो रही है। ऐसे कई लोग जेल से बाहर नहीं निकल सके हैं, जिन्हें अदालतों से जमानत मिल गयी है। शपथपत्र बनाने से लेकर दूसरे काम भी बंद हो गए हैं। ऐसे में वकीलों की जेब पर मार पड़ रही है। वकीलों का कहना है कि जिनकी जमानत मिल गयी है, उनके बेल बांड भरने से लेकर जमानत की प्रक्रिया पूरी करने की छूट कौंसिल को प्रदान करनी चाहिए।

परिवार चलाने में आ रही परेशानी:

वकीलों को आर्थिक सहायता के लिए अब तक सिर्फ पत्राचार ही किया जा सका है। राज्यभर में गिनती के ही ऐसे वकील होंगे जिन्हें कोरोना काल के पहले फेज से लेकर अब तक कौंसिल से कोई आर्थिक मदद मिली हो। नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर वकीलों ने बताया कि कौंसिल को वकीलों की जान की चिंता है, ये अच्छी बात है लेकिन कौंसिल को ये भी सोचना चाहिए कि वकील की जिंदगी के साथ उसके परिवार की भी जिंदगी जुड़ी है और परिवार चलाने के लिए सबसे जरूरी चीज है पैसा, जो इस हालत में ज्यादातर वकील नहीं कमा पा रहे हैं।

कौंसिल के कुछ सदस्यों ने भी असहमति जतायी:

अदालती कार्य नहीं करने के मामले पर बार कौंसिल की बैठक में रविवार को भी कौंसिल के कई सदस्यों ने विरोध किया था। उनका कहना था कि ऑनलाइन सुनवाई या किसी तरह की अन्य सुविधा प्रदान करनी चाहिए, ताकि वकीलों की परेशानी कम हो। लेकिन बहुमत के आधार पर दो मई तक अदालती कार्य नहीं करने का निर्णय लिया गया।

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