
शहर में टेंपो स्टैंड नहीं, चौक-चौराहों पर लगता है जाम
खूंटी नगर पंचायत क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की कमी है। बस स्टैंड, टेम्पो स्टैंड और शौचालय जैसी सुविधाएं जरूरी हैं, लेकिन उनका अभाव है। टेम्पो चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और यातायात...
खूंटी, संवाददाता। नगर पंचायत क्षेत्र अंतर्गत बुनियादी नगरीय सुविधाओं की घोर कमी है। शहर को व्यवस्थित रूप से चलाने के लिए बस स्टैंड, टेम्पो स्टैंड, शौचालय एवं पेयजल जैसी सुविधाओं का होना अत्यंत आवश्यक है, लेकिन खूंटी शहर में इन सुविधाओं का अभाव है। इसका खामियाजा न केवल शहरी निवासियों को, बल्कि दूर-दराज से आने वाले ग्रामीणों को भी भुगतना पड़ता है। खूंटी जिला के गठन को 18 वर्ष पूरे होने वाले हैं, लेकिन आज तक न ही व्यवस्थित बस स्टैंड प्रारंभ हो सका और न ही टेम्पो स्टैंड। शहर में टेम्पो के ठहराव के लिए कोई निश्चित स्थान नहीं है, जिसके कारण एनएच सहित प्रमुख मार्गों पर अस्थायी टेम्पो पड़ाव बन चुके हैं।
नेताजी चौक, भगत सिंह चौक, बाजारटांड़ और तोरपा रोड जैसी मुख्य सड़कों के किनारे टेम्पो खड़े रहते हैं। जिससे यातायात बाधित होती है और जाम की समस्या बढ़ती है। प्रतिदिन शहर में 250 से अधिक टेम्पो और ई रिक्शा चलते हैं, लेकिन सोमवार और शुक्रवार को लगने वाले साप्ताहिक बाजार के दिन इनकी संख्या और बढ़ जाती है। उन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाले टेम्पो भी खूंटी शहर में आ जाते हैं, जिससे यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है। शहर में बढ़ रही टेम्पो और ई रिक्शा की संख्याः कुछ वर्ष पहले शहर में टेम्पो की संख्या सीमित थी, लेकिन बढ़ती जनसंख्या और बेरोजगारी कारण अब अधिक युवा टेम्पो खरीदकर अपना रोजगार कर रहे हैं। हाल ही में बैटरी से चलने वाले ई रिक्शा की मांग भी बढ़ी है। पेट्रोल-डीजल की महंगाई और प्रदूषण की समस्या को देखते हुए लोग बैटरी से संचालित होने वाले ई रिक्शा को अधिक तव्वजों दे रहे हैं। वर्तमान समय में शहर में 200 से अधिक की संख्या में ई रिक्शा चल रहे हैं। दिनों दिन इनकी संख्या में इजाफा हो रहा है। जिससे यातायात पर दबाव भी बढ़ रहा है। टेम्पो चालकों को उठानी पड़ती है परेशानियां: शहर में स्थायी टेम्पो स्टैंड न होने का नुकसान केवल आम नागरिकों को ही नहीं, बल्कि टेम्पो चालकों को भी उठाना पड़ता है। कई बार प्रशासन द्वारा टेम्पो चालकों पर जुर्माना लगाया जाता है और उनके वाहनों को जब्त कर लिया जाता है। यातायात अव्यवस्था के लिए अक्सर टेम्पो चालकों को ही दोषी ठहराया जाता है। कुछ समय पहले प्रशासन ने शहर में एक व्यवस्थित टेम्पो स्टैंड बनाने के लिए जमीन चिन्हित करने की योजना बनाई थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यातायात नियमों की अनदेखी, दुर्घटनाओं का खतराः कई टेम्पो चालक यातायात नियमों की अनदेखी करते हैं। वे सवारी चढ़ाने और उतारने के लिए कहीं भी वाहन रोक देते हैं, जिससे सड़कों पर जाम लग जाता है। कई बार वे अचानक ब्रेक लगा देते हैं, जिससे पीछे चल रहे वाहन चालकों को भी ब्रेक लगानी पड़ती है। इससे कई बार सड़क दुर्घटनाएं भी होती हैं। इसके अलावा, शहर में कई नाबालिग भी टेम्पो चलाते देखे गए हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना और बढ़ जाती है। आम नागरिकों का कहना है मोटरसाइकिल और स्कूटी की तो नियमित जांच की जाती है, लेकिन टेम्पो चालकों की जांच नहीं होती। यदि नियमित जांच की जाए तो बिना लाइसेंस और बिना कागजात वाले टेम्पो सड़क से हटाए जा सकते हैं, जिससे जाम और दुर्घटनाओं में कमी आ सकती है। शहर में चलने वाले अधिकांश टेम्पो के पास निर्धारित रूट के परमिट भी नही है। जिसके कारण कोई भी ऑटो किसी भी रुट पर चलते हैं। जिससे चौक चौराहों के साथ साथ मुख्य मार्ग में भी अक्सर जाम लगा रहता है। शहर में नहीं है जेब्रा क्रॉसिंग, पैदल यात्रियों को परेशानीः खूंटी शहर के बीचों-बीच से एनएच-75 गुजरती है। इसी सड़क के किनारे कई स्कूल, कॉलेज, बाजार, बैंक, सरकारी और गैर-सरकारी कार्यालय स्थित हैं, लेकिन पूरे शहर में कहीं भी जेब्रा क्रॉसिंग नहीं बनाई गई है। इससे पैदल यात्रियों, खासकर स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को सड़क पार करने में भारी कठिनाई होती है। स्कूलों की छुट्टी के समय तो पूरा शहर जाम की चपेट में आ जाता है। शहर में टेम्पो स्टैंड नही होने से चालकों को भी काफी परेशानी होती है। स्टैंड के लिए स्थान चिन्हित नही होने के कारण मजबूरी में सड़क किनारे टेम्पो खड़ा करना पड़ता है। जिसमे टेम्पो चालकों की कोई गलती नही होने के बाद भी इसका खामियाजा चालकों को उठाना पड़ता है। जुर्माना भी वसूला जाता है। शहर में जल्द टेम्पो स्टैंड बननी चाहिए। मो नेजाम अंसारी, टेम्पो चालक। जिला बने 18 साल होने को हैं पर शहर में आज भी टेम्पो स्टैंड नही बन पाया। टेम्पो स्टैंड नही होने से ऑटो ड्राइवर काफी परेशान रहते हैं। प्रशासन का डंडा भी चालकों पर पड़ता है। पैसेंजर बैठाने में काफी तकलीफ होता है। सड़क किनारे अस्थायी पड़ाव बनाना पड़ता है। जिससे प्रशासन का कोप भाजन का शिकार भी होना पड़ता है। जिला प्रशासन जल्द से जल्द टेम्पो पड़ाव का स्थान चिन्हित कर स्टैंड बनावे। करमु हेमरोम, टेम्पो चालक। प्रशासन को टेम्पो स्टैंड के लिए जगह चिन्हित करनी चाहिए। स्थान चिन्हित नहीं होने की वजह से ही हम टेम्पो चालक मजबूरी में सड़क पर टेम्पो खड़ा कर सवारी उठाते हैं। युवा बेरोजगारी दूर करने के लिए मजबूरी में टेम्पो चलाते हैं। शहर में जबतक स्टैंड के लिए स्थान चिन्हित नही हो तबतक प्रशासन टेम्पो चालकों को परेशान नही करें। भीम सिंह, टेम्पो चालक।

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