बच्चों के लापता होने की सूचना पर त्वरित कार्रवाई हो : जस्टिस सुजीत
झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने लापता बच्चों और बाल तस्करी के मामलों पर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पीएलवी को सजग रहना चाहिए ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। रोजगार के अवसरों की कमी से युवाओं की समस्याएं बढ़ रही हैं, जिससे बाल तस्करी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

रांची, संवाददाता। झालसा के कार्यपालक अध्यक्ष सह झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने कहा कि राज्य में लापता बच्चों और बाल तस्करी के बढ़ते मामलों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित तंत्र और पैरा लीगल वॉलेंटियर्स (पीएलवी) अधिक सतर्क रहें, तो कई बच्चों को समय रहते सुरक्षित किया जा सकता है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने ये बातें शनिवार को डोरंडा स्थित झालसा के न्याय सदन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में झालसा गतिविधि कैलेंडर-2026 और वार्षिक पत्रिका ‘न्याय डगर’ (विशेष अंक-2025) के विमोचन के अवसर पर कही। न्यायमूर्ति ने कहा कि पुलिस थाना, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर तैनात पीएलवी को अपने कर्तव्यों के प्रति और अधिक सजग रहना चाहिए, ताकि किसी बच्चे के लापता होने की सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई हो सके।
उन्होंने यह भी कहा कि रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने के कारण झारखंड के युवाओं को राज्य से बाहर जाना पड़ता है, जिससे कई सामाजिक समस्याएं जन्म लेती हैं। उन्होंने बताया कि न्यायिक आदेशों के बाद कई तस्करी पीड़ित बच्चों को मुक्त कराया गया है, लेकिन पुनर्वास के बाद आजीविका की समस्या उनके सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ी होती है। ऐसे बच्चों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने की आवश्यकता है, ताकि उन्हें दोबारा राज्य से बाहर न जाना पड़े।
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