
स्कूलों के साथ गांव-टोलों की हैबिटेशन टैगिंग होगी, शिक्षकों को मिलेगा शिशु पंजी सर्वे का जिम्मा
झारखंड के स्कूलों के साथ गांव-टोलों की हैबिटेशन टैगिंग 15 अक्तूबर तक की जाएगी। 35,500 स्कूलों को टैग किया जाएगा और शिक्षकों को पोषण क्षेत्र के स्कूलों को टैग करने का काम सौंपा जाएगा। इसके बाद हाउस...
रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। झारखंड के स्कूलों के साथ अब गांव-टोलों की भी हैबिटेशन टैगिंग की जाएगी। इस प्रक्रिया को 15 अक्तूबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सभी जिलों को आवश्यक निर्देश दे दिए गए हैं। राज्य के 35,500 स्कूलों को गांव और टोलों से टैग किया जाएगा। शिक्षकों को उनके पोषण क्षेत्र के स्कूलों को टैग करने का काम सौंपा जाएगा। इस दौरान यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी घर छूटे नहीं और न ही किसी भी घर की ओवरलैपिंग हो। स्कूलों की टैगिंग पूरी होने के बाद हाउस होल्ड सर्वे शुरू किया जाएगा। इस सर्वे में जिलों के सभी गैर-सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों (अल्पसंख्यक सहित), सहायता प्राप्त विद्यालय, सहायता प्राप्त संस्कृत और मदरसा के शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी शिशु पंजी सर्वे के कार्य में जिम्मेदारी दी जाएगी।

शिक्षक-शिक्षिकाओं की मदद सर्वे कार्य में ले सकेंगे सरकारी स्कूलों के प्रधानाध्यापक अपने निकट के गैर-सरकारी सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाओं की मदद सर्वे कार्य में ले सकते हैं। हालांकि, अंतिम रिपोर्ट सरकारी विद्यालय की ओर से ही तैयार की जाएगी। इसके लिए, बीईईओ (प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी)/अवर विद्यालय निरीक्षक यह सुनिश्चित करेंगे कि सरकारी विद्यालयों के निकटवर्ती गैर-सरकारी अल्पसंख्यक विद्यालयों को सरकारी विद्यालय के साथ टैग कर दिया जाए। बीईईओ/अवर विद्यालय निरीक्षक द्वारा टैगिंग किए जाने के बाद, सरकारी विद्यालय के शिक्षक टैग किए गए गैर-सरकारी सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक से विचार-विमर्श करके, उनके शिक्षकों को सर्वे के लिए घरों की संख्या आवंटित करेंगे।

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