
कृषि क्षेत्र में झारखंड के पास बड़ी संभावनाएं : प्रोफेसर देव
झारखंड को समावेशी विकास की दिशा में ले जाने के लिए खनिज संसाधन और कृषि महत्वपूर्ण अवसर हैं। प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि राज्य की प्राकृतिक सुंदरता का उपयोग कर पर्यटन को बढ़ावा देना आवश्यक है। इसके लिए सिंचाई, वेयरहाउसिंग और निर्यात संवर्धन की जरूरत है।
रांची, संवाददाता। झारखंड को समावेशी विकास के पथ पर ले जाने के लिए खनिज संसाधन और कृषि प्रमुख अवसर हैं। बड़े पैमाने पर औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, एमएसएमई को बढ़ावा और राज्य की प्राकृतिक सुंदरता का उपयोग कर पर्यटन को विकसित करने की आवश्यकता है। कृषि क्षेत्र में झारखंड के पास बड़ी संभावनाएं हैं। लेकिन इसके लिए सिंचाई सुविधाओं की कमी, छोटे जोत, आकार और साहूकारों पर निर्भरता जैसी समस्याओं का समाधान जरूरी है। वेयरहाउसिंग, कोल्ड चेन और निर्यात संवर्धन को बढ़ावा देना आवश्यक है। ये बातें गुरुवार को प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष प्रो. एस. महेंद्र देव ने कही।

वे झारखंड गठन के 25 वर्ष पूरे होने पर इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट (आईएचडी) और कृष्ण लोक प्रशासन संस्थान की ओर से समृद्ध एवं समावेशी झारखंड की ओरः दृष्टि और रणनीतियां विषय पर तीन दिनी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बोल रहे थे। कृष्ण लोक प्रशासन संस्थान (स्किपा) में आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश के नीति-निर्माता, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद और विकास विशेषज्ञ शामिल हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि झारखंड को ऐसा विकास चाहिए जो समावेशी हो और जिसके लाभ समाज के कमजोर वर्गों को विशेषकर आदिवासी समुदाय तक पहुंचे। गरीबी कम करना मुख्य उदेश्य होना चाहिए। इसके लिए राज्य में मानव और भौतिक अवसंरचना की खाई को पाटने व सतत खनन पर ध्यान देना होगा। यह भी कहा कि झारखंड ने जीएसडीपी और प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय प्रगति की है। हालांकि, औपचारिक रोजगार के अवसरों की कमी, शहरी महिलाओं की श्रम सहभागिता का निम्न स्तर और गरीबी राज्य के सामने मौजूद चुनौतियां हैं। उद्घाटन सत्र में आईएचडी निदेशक प्रो. आलख एन शर्मा ने स्वागत वक्तव्य देते हुए कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य राज्य की प्रगति और चुनौतियों का आकलन कर एक समावेशी और सुदृढ़ विकास रोडमैप तैयार करना है। उद्घाटन सत्र में द आदिवासी ऑफ झारखंड इन सर्च ऑफ पीपलहुड पुस्तक का विमोचन भी किया गया। पहले तकनीकी सत्र में पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद् टीसीए अनंत की अध्यक्षता में झारखंड के 25 वर्षों की विकास यात्रा की समीक्षा हुई। आईएचडी के प्रो. बलवंत सिंह मेहता ने बताया कि राज्य अपने जनसांख्यिकीय लाभांश के सर्वोत्तम दौर में प्रवेश कर चुका है। कृषि अभी भी श्रम-प्रधान है, स्वास्थ्य व शिक्षा में सुधार हुआ है। पर कुपोषण, एनीमिया, उच्च ड्रॉपआउट जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। रोजगार बढ़ा है, लेकिन अधिकांश अनौपचारिक हैं। दूसरे सत्र में कृषि विविधीकरण पर चर्चा हुई। आईएफपीआरआई के डॉ. अंजनी कुमार ने बताया कि राज्य में सिर्फ 17% क्षेत्र सिंचित है, जिससे उत्पादकता प्रभावित होती है। विशेषज्ञों ने पशुपालन, मत्स्य पालन, मिलेट्स, एफपीओ, और एनटीएफपी को मजबूत कर कृषि को नई दिशा देने की जरूरत बताई। कृषि सचिव अबूबकर सिद्दीकी ने महिला किसानों पर केंद्रित योजनाओं का उल्लेख किया। तीसरे सत्र में समावेशन और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण पर प्रमुख समाजशास्त्रियों ने भूमि अधिकार, पोषण, शिक्षा और सांस्कृतिक संवेदनशीलता के मुद्दों पर चर्चा की।

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