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जिन जिलों में टीबी के संदिग्ध कम, वहां जांच की संख्या बढ़ाएं : अजय

जिन जिलों में टीबी के संदिग्ध कम, वहां जांच की संख्या बढ़ाएं : अजय

संक्षेप:

झारखंड के स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने टीबी के संदिग्ध मामलों की संख्या कम होने वाले जिलों में जांच बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी सरकारी विभागों को संवेदनशील समूहों की स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने और निक्षय पोर्टल पर डेटा दर्ज करने का आदेश दिया। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जनभागीदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

Jan 07, 2026 09:45 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रांची
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रांची, हिब्यू। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने निर्देश दिया है कि जिन जिलों में टीबी के संदिग्ध मामलों की संख्या कम है, वहां कारणों की समीक्षा करें, जांच की संख्या बढ़ाएं। साथ ही उन्होंने सभी सरकारी विभागों को अपने-अपने विभागों के अंतर्गत आने वाले संवेदनशील समूहों की स्क्रीनिंग सुनिश्चित करते हुए निक्षय पोर्टल पर डेटा प्रविष्टि की हिदायत दी है। उद्योग विभाग को नि-क्षय मित्र पहल के तहत टीबी मरीजों को गोद लेने एवं सहयोग प्रदान करने के लिए आवश्यक पत्राचार करने की बात कही। अपर मुख्य सचिव बुधवार को नेपाल हाउस स्थित सचिवालय में राष्ट्रीय क्षयरोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत राज्य टीबी फोरम की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

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राज्य यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. कमलेश कुमार ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि कार्यक्रम के अंतर्गत जोखिम वाले समूहों एवं क्षेत्रों में निक्षय वाहन, मोबाइल मेडिकल यूनिट एवं हैंड-हेल्ड एक्स-रे के माध्यम से संभावित टीबी मरीजों की खोज की जा रही है। बैठक में एनएचएम, झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य डॉ सिद्धार्थ सान्याल, राज्य यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ कमलेश कुमार के अलावा डाक विभाग, खाद्य विभाग, उपभोक्ता मामले विभाग, श्रम विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, शिक्षा विभाग, परिवहन विभाग, पंचायती राज विभाग, झारखंड चौंबर ऑफ कॉमर्स सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। सभी जिलों में ट्रूनेट मशीनों से जांच की सुविधा अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया गया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जनभागीदारी को और मजबूत किया जाए। उन्होंने न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (एनएएटी) जांच की संख्या बढ़ाने के साथ ही सभी पंचायतों में टीबी फोरम का गठन करने, निक्षय मित्रों की संख्या में वृद्धि तथा टीबी मरीजों को अतिरिक्त पोषण सहायता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। साथ ही राज्य में चरणबद्ध तरीके से 134 अतिरिक्त हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीन उपलब्ध कराने, सभी जिलों में सुगमता पूर्वक टीबी जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ट्रूनेट मशीनों की खरीद, उपकरणों के एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (एएमसी), नियमित जिला टीबी पदाधिकारियों की नियुक्ति एवं आगामी 100 दिवसीय टीबी अभियान की तैयारी पर भी चर्चा की गई। रिम्स में सीडीएसटी लैब का सुदृढ़ीकरण पूरा बैठक में बताया गया कि धनबाद में कल्चर ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग (सीडीएसटी) लैब पूर्ण रूप से क्रियाशील हो चुकी है, जिससे आईआरएल इटकी, रांची का भार कम हुआ है। रिम्स में सीडीएसटी लैब का सुदृढ़ीकरण पूरा कर लिया गया है, जिसका उद्घाटन शीघ्र किया जाएगा। डाक विभाग के सहयोग से खारिज का नमूना एवं परिवहन सेवा की शुरुआत रांची में की गई है, जिसे 15 जनवरी 2026 तक पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। राज्य के 18 जिलों में पंचायत टीबी फोरम का गठन किया जा चुका है और रांची, चतरा, लातेहार, जमशेदपुर, बोकारो, कोडरमा एवं गिरिडीह जिलों में हैंड-हेल्ड एक्स-रे उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे सामुदायिक स्तर पर स्क्रीनिंग को बढ़ावा मिलेगा।