शहादत दिवस पर याद आए धरती आबा, लेकिन उलिहातू की समस्याएं अब भी बरकरार

हिन्दुस्तान, रांची
Follow us on Google News
share

नौ जून को झारखंड के महानायक भगवान बिरसा मुंडा का शहादत दिवस है। उनके पैतृक गांव उलिहातू में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। ग्रामीणों को पानी के लिए दूर-दराज के जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है। शहीद आवास निर्माण कार्य अधूरे हैं और सफाई व्यवस्था से ग्रामीण असंतुष्ट हैं।

शहादत दिवस पर याद आए धरती आबा, लेकिन उलिहातू की समस्याएं अब भी बरकरार

अड़की, प्रतिनिधि। नौ जून झारखंड के महानायक अमर शहीद भगवान बिरसा मुंडा का शहादत दिवस है। वर्ष 1900 में इसी दिन रांची जेल में उनकी मृत्यु हुई थी। मात्र 25 वर्ष की आयु में अंग्रेजों के खिलाफ महाउलगुलान का नेतृत्व करने वाले धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा का पैतृक गांव उलिहातू आज भी कई बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातू और इसके आसपास के गांवों में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। बाड़ीनिजकेल पंचायत के तुबिद, बेड़ाडीह, जोपनो, लेपसेर, सेल्दा, गसार, पीड़िटोली और कुईल गांवों के ग्रामीण पानी की समस्या से परेशान हैं। गर्मी के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है तथा लोगों को दूर-दराज के जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है।

बिरसा ओड़ा में भी पानी की कमी:

भगवान बिरसा मुंडा के स्मृति स्थल बिरसा ओड़ा परिसर में वर्षों पहले लगाया गया सोलर जलमीनार लंबे समय से खराब पड़ा था। इससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी परेशानी उठानी पड़ रही थी। हालांकि शहादत दिवस के पूर्व प्रशासन ने जलमीनार की मरम्मत करा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि अक्सर किसी बड़े कार्यक्रम से पहले ही खराब सुविधाओं को दुरुस्त किया जाता है, जबकि नियमित रखरखाव नहीं होता।

अधूरे पड़े हैं शहीद आवास:

उलिहातू में शहीद ग्राम विकास योजना के तहत आवास निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन बड़ी संख्या में आवास अब भी अधूरे पड़े हुए हैं। जानकारी के अनुसार गांव में 75 शहीद आवास आवंटित किए गए हैं, जिनमें से काफी आवासों का निर्माण अभी तक पूरा नहीं हो सका है। मजबूरी में कई परिवार आज भी तिरपाल, खपरैल और मिट्टी के घरों में रह रहे हैं।

सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में असंतोष:

मंगलवार को शहादत दिवस की तैयारी के तहत बिरसा ओड़ा परिसर और आसपास सफाई अभियान चलाया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि सफाई कार्य में प्रशासन की सक्रियता अपेक्षित स्तर पर नहीं दिखी। उन्होंने बताया कि बिरसा मुंडा के वंशज परिवार के सदस्यों ने स्वयं आगे बढ़कर बिरसा ओड़ा परिसर और मुख्य सड़क की सफाई की।

सुविधाओं के स्थायी समाधान की मांग:

ग्रामीणों का कहना है कि शहादत दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर प्रशासन को व्यापक स्तर पर सफाई, रंग-रोगन और आधारभूत सुविधाओं के विकास पर ध्यान देना चाहिए। उनका कहना है कि उलिहातू केवल एक गांव नहीं, बल्कि झारखंड की अस्मिता और गौरव का प्रतीक है। इसलिए यहां की समस्याओं का स्थायी समाधान होना चाहिए, ताकि भगवान बिरसा मुंडा की विरासत के अनुरूप गांव का समुचित विकास सुनिश्चित हो सके।

सामान्य प्रश्न

भगवान बिरसा मुंडा का शहादत दिवस कब मनाया जाता है?
भगवान बिरसा मुंडा का शहादत दिवस नौ जून को मनाया जाता है।
Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।

Hindi NewsJharkhand NewsRanchi Newsशहादत दिवस पर याद आए धरती आबा, लेकिन उलिहातू की समस्याएं अब भी बरकरार