
झारखंड को 15वें वित्त आयोग के 692 करोड़ रुपये अनुदान जारी करेगा केंद्र
गांवों में बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद, टाइड फंड में 277 करोड़ और अनटाइड फंड में 415.15 करोड़ रुपये मिलेंगे, वित्तीय
रांची। हिन्दुस्तान ब्यूरो पंचायती राज मंत्रालय भारत सरकार ने 15वें वित्त आयोग के तहत झारखंड को वित्तीय वर्ष 2024-25 के अनुदान की पहली किश्त जारी करने की अनुशंसा कर दी है। झारखंड को 692 करोड़ रुपये अनुदान मिलेगा, जिससे गांवों में बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है। इसमें टाइड फंड में 277 करोड़ और अनटाइड फंड में 415.15 करोड़ रुपये पहली किश्त के रूप में झारखंड को मिलेंगे। वित्तीय वर्ष 2024-25 में झारखंड को कुल 1385 करोड़ रुपये अनुदान मिलना है। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि झारखंड ने ग्रामीण स्थानीय निकायों को अनुदान दिए जाने से संबंधित लगभग सभी पात्रता शर्तें पूरी कर ली हैं।

केंद्र सरकार की ओर से प्राप्त सूचना के बाद राज्य के ग्रामीण विकास कार्यों के लिए राशि जारी होने का रास्ता साफ हो गया है। जानकारी के अनुसार पंचायती राज मंत्रालय की ओर से अनुदान की सिफारिश उन्हीं ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के लिए की गई है, जो विधिवत निर्वाचित होने, योजना अपलोड करने, वित्तीय वर्ष लेखा-जोखा और ऑनलाइन ऑडिट पूरा करने की शर्तों पर खरे उतरे हैं। राज्य में कुल 4633 ग्रामीण स्थानीय निकाय हैं, जिनमें 24 जिला परिषद, 264 पंचायत समिति और 4345 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 99.70 प्रतिशत निकायों (4633 में से 4619) ने ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपनी विकास योजनाएं अपलोड कर दी हैं। इसलिए भारत सरकार ने अनुदान की अनुशंसा कर दी है। विधानसभा में उठा था मुद्दा झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन केंद्र-राज्य फंड और योजनाओं को लेकर सत्ता पक्ष व विपक्ष में तीखी बहस हुई थी। सत्ता पक्ष ने केंद्र पर सौतेला व्यवहार, फंड रोकने और नई शर्तें थोपने का आरोप लगाया। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि केंद्रीय पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री मिलने का समय नहीं दे रहे। 15वें वित्त आयोग के करीब 2736 करोड़ रुपये झारखंड को नहीं दिए जा रहे हैं। दृसरी ओर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा था कि राज्य सरकार के अधिकारी केंद्र सरकार के अधिकारी के साथ बैठक कर तकनीकी त्रुटियों को दूर करें।

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