छह साल के बिजली टैरिफ का खाका सार्वजनिक

Dec 19, 2025 09:43 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रांची
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टैरिफ बढ़ोतरी की तैयारी, विद्युत नियामक आयोग के समक्ष प्रस्ताव, आपत्तियों के लिए आम जनता और उपभोक्ताओं को दिया गया मौका

छह साल के बिजली टैरिफ का खाका सार्वजनिक

रांची। हिन्दुस्तान ब्यूरो झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड ने वित्तीय वर्ष 2025-26 से लेकर 2030-31 तक के लिए बिजली टैरिफ, वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर), एग्रीगेट रेवेन्यू रिक्वायरमेंट और बिजनेस प्लान से जुड़ा विस्तृत पब्लिक नोटिस जारी किया है। यह नोटिस झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष दाखिल याचिका के आधार पर प्रकाशित किया गया है। निगम ने आम उपभोक्ताओं, उद्योगों और अन्य हितधारकों से निर्धारित समय सीमा के भीतर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष दाखिल इस प्रस्ताव से साफ है कि झारखंड में बिजली वितरण की लागत लगातार बढ़ रही है। बिजली खरीद, ब्याज, कर्मचारी व्यय और पूंजीगत निवेश का बोझ अंततः टैरिफ में झलक सकता है।

आने वाले महीनों में होने वाली सार्वजनिक सुनवाई और आयोग का फैसला तय करेगा कि उपभोक्ताओं पर बिजली कितनी महंगी होगी। 2025-26 के लिए बिजली खरीद पर 8,726 करोड़ रुपये से अधिक खर्च का अनुमान सार्वजनिक सूचना में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जेबीवीएनएल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल बिजली खरीद खर्च 8,726.06 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया है। इसमें थर्मल, हाइड्रो और अन्य स्रोतों से खरीदी जाने वाली बिजली शामिल है। बिजली खरीद लागत में पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दिखाई गई है, जिसका सीधा असर टैरिफ पर पड़ने की आशंका है। निगम ने यह भी स्वीकार किया है कि वितरण हानि के कारण कुछ राशि को डिसएलाउट किया गया है, लेकिन इसके बावजूद कुल खर्च में लगातार इजाफा हो रहा है। संचालन और रखरखाव खर्च में भी बढ़ोतरी एआरआर के आंकड़ों के अनुसार संचालन और रखरखाव मद में 972.87 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है। इसमें कर्मचारियों का वेतन, प्रशासनिक एवं सामान्य खर्च, मरम्मत और रखरखाव शामिल हैं। कर्मचारी व्यय लगभग 276.30 करोड़ रुपये बताया गया है, जबकि प्रशासनिक खर्च 119.95 करोड़ रुपये के आसपास रखा गया है। ब्याज और रिटर्न ऑन इक्विटी का बोझ निगम ने लंबी अवधि के कर्ज पर ब्याज के रूप में 380.28 करोड़ रुपये और इक्विटी पर रिटर्न के तौर पर 445.24 करोड़ रुपये की मांग की है। इसके अलावा कार्यशील पूंजी पर ब्याज और उपभोक्ता सुरक्षा जमा पर ब्याज भी शामिल किया गया है। बैंक और वित्तीय शुल्क के रूप में भी राशि जोड़ी गई है। 2025-26 के लिए कुल राजस्व आवश्यकता सभी खर्चों और गैर-टैरिफ आय को घटाने के बाद वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कुल वार्षिक राजस्व आवश्यकता 10,725.26 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके मुकाबले मौजूदा टैरिफ से मिलने वाला अनुमानित राजस्व कम बताया गया है, जिससे राजस्व अंतर बना हुआ है। निगम के अनुसार यह गैप पिछले वर्षों से चला आ रहा है और 2026-27 तक यह और बढ़ सकता है। 2026-27 से 2030-31 तक खर्च और एआरआर में तेज बढ़ोतरी का अनुमान पब्लिक नोटिस में दिए गए टेबल के अनुसार 2026-27 में बिजली खरीद खर्च 9,836.89 करोड़ रुपये, 2027-28 में 10,797.84 करोड़ रुपये, 2028-29 में 11,800.37 करोड़ रुपये और 2029-30 में 12,899.32 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इसी तरह 2030-31 तक यह खर्च और बढ़ने का अनुमान है। इन वर्षों में एग्रीगेट रेवेन्यू रिक्वायरमेंट भी क्रमशः 12,678 करोड़ रुपये से बढ़कर 16,846 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। साफ है कि यदि अतिरिक्त सब्सिडी या अन्य राहत नहीं मिली तो आने वाले वर्षों में उपभोक्ताओं पर टैरिफ का दबाव बढ़ सकता है। टैरिफ प्रस्ताव : घरेलू से लेकर उद्योग तक असर निगम ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नया टैरिफ प्रस्ताव भी रखा है। इसके तहत घरेलू, वाणिज्यिक, गैर-घरेलू सेवा, औद्योगिक, कृषि, रेलवे ट्रैक्शन, स्ट्रीट लाइट, एमएसएमई और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग श्रेणियों के लिए अलग-अलग स्लैब तय किए गए हैं। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए प्रति यूनिट दर में बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं फिक्स्ड चार्ज और डिमांड चार्ज में भी इजाफा सुझाया गया है। औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए प्रति यूनिट ऊर्जा शुल्क के साथ-साथ केवीए आधारित डिमांड चार्ज बढ़ने की संभावना जताई गई है। पूंजीगत खर्च पर बड़ा फोकस निगम ने 2026-27 से 2030-31 की नियंत्रण अवधि के लिए पूंजीगत खर्च का भी विस्तृत खाका पेश किया है। इसमें आरडीएसएस योजना, स्मार्ट मीटरिंग, नेटवर्क सुदृढ़ीकरण, सबस्टेशन और लाइन विस्तार जैसी योजनाएं शामिल हैं। कुल पूंजीगत योजना 3,900 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। स्मार्ट मीटरिंग और एग्रीगेशन एवं नेटवर्क मॉडर्नाइजेशन पर विशेष जोर दिया गया है। उपभोक्ताओं से मांगे गए सुझाव और आपत्तियां पब्लिक नोटिस के अनुसार, उपभोक्ता और आम जनता इस याचिका पर अपनी आपत्तियां और सुझाव लिखित रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं। आपत्तियां अंग्रेजी या हिंदी में दी जा सकती हैं, जिसमें पूरा पता, मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी देना अनिवार्य होगा। निर्धारित शुल्क के साथ आयोग के कार्यालय में आवेदन जमा करना होगा। सभी आपत्तियां 16 जनवरी 2026 तक स्वीकार की जाएंगी। इसके बाद सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की जाएगी, जिसकी तिथि अलग से घोषित की जाएगी। नियामक आयोग की भूमिका पूरी प्रक्रिया झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के अधीन चल रही है। आयोग उपभोक्ताओं, उद्योगों और निगम के तर्कों को सुनने के बाद टैरिफ पर अंतिम फैसला लेगा। उपभोक्ता संगठनों की नजर इस बात पर टिकी है कि आयोग बढ़ती लागत और आम लोगों की भुगतान क्षमता के बीच किस तरह संतुलन बनाता है।

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