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बोले रांची: मानदेय आखिर कब बढ़ेगा, समय पर भुगतान तो करें

बोले रांची: मानदेय आखिर कब बढ़ेगा, समय पर भुगतान तो करें

संक्षेप:

झारखंड के पंचायत प्रतिनिधियों ने 'बोले रांची' कार्यक्रम में कहा कि उन्हें समय पर मानदेय राशि नहीं मिलती है। उन्होंने राज्य सरकार से मानदेय राशि बढ़ाने और बीमा, पेंशन, तथा सुरक्षा की सुविधाएं देने की मांग की। पंचायत व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उनकी वित्तीय शक्तियों को बहाल करने की आवश्यकता है।

Nov 18, 2025 01:22 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रांची
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रांची, संवाददाता। हिन्दुस्तान की ओर से पंचायत के जनप्रतिनिधियों के बीच बोले रांची कार्यक्रम आयोजित किया गया। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि हमारी सबसे बड़ी समस्या है कि समय पर मानेदय राशि नहीं मिलती है। अन्य राज्यों की तर्ज पर झारखंड में भी हमलोगों की मानदेय राशि बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि सरकार के कार्य करने के बावजूद न बीमा, न पेंशन और न ही मुआवजा राशि तक की सुविधा दी गई है। सुरक्षा की दुष्टि से भी किसी प्रकार की कोई सुरक्षा नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार से अनुरोध है कि हमारी मांगों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए।

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हिन्दुस्तान के बोले रांची कार्यक्रम में पंचायत के जनप्रतिनिधियों ने कहा कि भारत में पंचायती राज व्यवस्था को लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव मानी जाती है। पंचायती राज व्यवस्था में शामिल होने वाले जनप्रतिनिधि किसी भी ग्रामीण क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाते हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से जिम्मेदारी और भागीदारी है, उसी प्रकार से मानदेय भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। समान वितरण जरूरतमंदों तक हो उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जरूरत के हिसाब से स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति और जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए होती है, ताकि सभी योजनाओं का समान वितरण जरूरतमंदों तक हो। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर मुखिया, प्रखंड स्तर पर प्रमुख और जिला स्तर पर जिला परिषद अध्यक्ष होते हैं, जो सरकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाते हैं। ग्रामीण पंचायत स्तर पर मुखिया गांव के पहले जनप्रतिनिधि होते हैं। मुखिया ग्रामसभा की बैठकों का संचालन करते हैं। मुखिया क्षेत्र में साफ-सफाई, सड़क, शौचालय निर्माण, राशन वितरण, निगरानी और सामाजिक सुरक्षा जैसी योजनाओं का क्रियान्वयन कराते हैं। इसकी पूरी जिम्मेदारी मुखिया की होती है। इसके अलावा मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, राज्य स्तर पर चल रही अबुआ आवास जैसी योजनाओं से लोगों को जोड़ने की जिम्मेवारी मुखियाओं पर होती है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य करने की सभी जिम्मेवारी होती है। लेकिन, मुखिया आज भी सुविधाओं से वंचित हैं। समस्याओं का समाधान करने में महत्वपूर्ण भूमिका जनप्रतिनिधियों ने कहा कि प्रखंड स्तर पर होने वाले सभी कार्य प्रमुख व प्रखंड समिति सदस्य के होते हैं। गांवों से आने वाली सभी प्रकार की सामूहिक समस्याओं का समाधान करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। प्रखंड के विकास को लेकर योजनाओं को स्वीकृति देना, स्कूल आंगनबाड़ी की निगरानी, स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति पर ध्यान देना और सरकारी योजनाओं को प्रभावी रूप से जमीन तक पहुंचाना इनके समकक्ष होता है। वहीं, जिला परिषद स्तर पर जिप अध्यक्ष व सदस्य जिले की बड़ी विकास परियोजनाओं पर निर्णय लेते हैं। इनमें सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई, कृषि, जनकल्याण व रोजगार से जुड़े महत्त्वपूर्ण कार्यों होते है। साथ ही योजना का निर्माण इसी स्तर पर किया जाता है। जिला परिषद के प्रतिनिधि राज्य सरकार और जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी को जोड़ने का काम करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास करने के लिए यह त्रिस्तरीय विधि का प्रयोग किया जाता है। जनप्रतिनिध क्षेत्र का विकास कर सकें जनप्रतिनिधियों की मांग है कि उन्हें क्षेत्र में जरूरत के हिसाब से टाइड और अनटाइड की राशि को खर्च करने व चेक द्वारा भुगतान करने का अधिकार दिया जाए, ताकि जनप्रतिनिध क्षेत्र का विकास कर सकें। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से मिलने वाली टाइड राशि का उपयोग विशेष उद्देश्य या निर्धारित योजनाओं के लिए ही खर्च किया जा सकता है। इनमें जलापूर्ति, स्वच्छता और पेयजल योजनाएं शामिल हैं। वहीं, अनटाइड राशि का उपयोग स्वतंत्र रूप से क्षेत्र के विकास में जनप्रतिनिधि क्षेत्र की टूटी-फूटी सड़क की मरम्मत, स्ट्रीट लाइट व अन्य कार्य के लिए कर सकते हैं। त्रिस्तरीय जनप्रतिनिधियों की मांग है कि सरकार उन्हें भी टाइड का स्वतंत्र रूप से प्रयोग करने की अनुमित दें। समस्याएं 1. त्रिस्तरीय जनप्रतिनिधियों को पिछले कई महीनों से मानदेय राशि का भुगतान नहीं किया गया 2. अन्य राज्यों में पंचायत जनप्रतिनिधियों की मानेदय राशि बढ़ी हुई है। 3. सरकार की ओर से दुर्घटना और आकस्मिक मृत्यु होने पर परिवार को सुविधाएं नहीं दी जाती। 4. जनप्रतिनिधि के ऊपर कई जिलों में जानलेवा हमला के मामले सामने आ चुके हैं। 5. सेवानृवत्ति के बाद सरकार की ओर से किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं दी जाती। सुझाव 1. राज्य सरकार सभी त्रिस्तरीय जनप्रतिनिधियों की बकाया राशि का भुगतान जल्द से जल्द करे। 2. बिहार और केरल राज्य की तर्ज पर झारखंड में मानदेय राशि बढ़ाई जाए। 3. सरकार की ओर से सभी को स्वास्थ्य बीमा व मृत्यु पर 30 लाख रुपए की राशि दी जाए। 4. जनप्रतिनिधियों को उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अंगरक्षक व शस्त्र लाईसेंस दिए जाएं। 5. पेंशन राशि की सुविधाएं दी जाए, ताकि सेवानिवृत्ति के बाद परेशानी न हो। :: किसने क्या कहा :: पंचायतों में कार्य करने वाले मुखियाओं को अबतक समय से मानदेय राशि तक नहीं मिली है। इस वजह से काम करने में भी समस्या होती है। अबतक हम सभी को 15वें वित्त आयोग एवं राज्य वित्त आयोग की राशि तत्काल उपलब्ध कराई जाए, ताकि हमलोगों को जनता की सेवा करने में किसी प्रकार की कोई समस्या न हो। समय पर सभी राशि का भुगतान किया जाए। -सुबोध यादव झारखंड राज्य प्राकृतिक और खनन क्षेत्र है। कई जिले खनिज संपदाओं से भरपूर हैं। सरकार को इन खनिज संपदाओं से मिलने वाले डीएमएफटी फंड का उपयोग त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के अनुसार करना चाहिए, ताकि पंचायत के जनप्रतिनिधि क्षेत्र के विकास करने में मदद कर सकें। इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। -उदय सिंह हम मुखियाओं पर कई बार जानलेवा हमला भी किया गया है। सरकार हमें अपनी सुरक्षा के लिए अंगरक्षक व शस्त्र लाइसेंस उपलब्ध कराए। -अरविंद सिंह अक्सर हमारी वित्तीय शक्तियां जांच के बिना ही कई कारण से जब्त कर ली जाती हैं। जब्त कर ली गई शक्तियों को बहाल किया जाए। -राजेंद्र पांडे सरकार के 14 विभाग और 29 विषयों में भी अधिकार दिए जाएं, ताकि हम जनप्रतिनिधियों को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो सके। -प्रदीप महतो हम सभी लोगों को समय पर किसी भी योजना की राशि नहीं मिल पाती है, जिस कारण से अक्सर क्षेत्र में कार्य करने में समस्या होती है। -सुषमा कुजूर राज्य और केंद्र सरकार पंचायत के जनप्रतिनिधयों की मानेदय राशि में बढ़ोतरी करे। साथ ही राशि का भुगतान भी समय पर किया जाए। -कमला किंडो क्षेत्र में जरूरत के हिसाब से टाइड और अनटाइड की राशि को खर्च करने और चेक द्वारा भुगतान करने का अधिकार दिया जाए। -रोजएलिया टोप्पो अपनी सेवा समाप्ति के बाद सरकार की ओर से पेंशन राशि दी जाए, ताकि हम भी अपना जीवनयापन आराम से कर सकें। -अनी अख्तर अक्सर काम के लिए क्षेत्र में भ्रमण करना पड़ता है। कई बार आकस्मिक मृत्यु व दुर्घटना की आशंका रहती है। बीमा व मुआवजा मिले। -रोशनी कुजूर वर्ष 2024-25 में स्वीकृत अबुआ आवास के लाभुकों को जल्द से जल्द राशि का भुगतान किया जाए। पीएम आवास की राशि बढ़ाई जाए। -प्रमिला मिंज केरल और बिहार राज्य की तर्ज पर झारखंड में भी मासिक मानदेय राशि में बढ़ोतरी की जाए और तत्काल इसका लाभ दिया जाए। - नरेश प्रसाद सरकारी कर्मियों की तर्ज पर सड़क दुर्घटना व आक्समिक मृत्यु के समय बीमा व मुआवजा राशि लगभग तीस लाख रुपए दिए जाएं। -मुकेश टुडू सांसद व विधायक मद की तर्ज पर राज्य वित्त आयोग के द्वारा हम पंचायत के जनप्रतिनिधियों को भी निजी क्षेत्र के विकास में मदद मिले।