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दावोस में एक भी नया बड़ा निवेश समझौता नहीं : प्रतुल

दावोस में एक भी नया बड़ा निवेश समझौता नहीं : प्रतुल

संक्षेप:

झारखंड भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने दावोस में राज्य के लिए नए निवेश की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि झारखंड ने कोई नया बड़ा निवेश समझौता नहीं किया, जबकि अन्य राज्यों ने करोड़ों के निवेश का वादा किया। टाटा स्टील के ग्रीन समझौते को पहले से स्वीकृत परियोजनाओं का री-पैकेजिंग बताया।

Jan 27, 2026 07:07 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रांची
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रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा है कि दावोस में भारत के पांच मुख्यमंत्री अपने राज्यों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। जहां एक ओर महाराष्ट्र सरकार ने दावोस में लगभग ₹14 से 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर किए, वहीं तेलंगाना सरकार ने करीब ₹29,000 करोड़ रुपये के ठोस निवेश करार किए। जिनमें डेटा सेंटर, एआई, ग्रीन एनर्जी और मैन्यूफैक्चरिंग जैसे सेक्टर शामिल हैं। अन्य राज्यों ने भी हजारों करोड़ के ठोस निवेश के वायदे प्राप्त किए। प्रतुल ने कहा कि दूसरी ओर झारखंड के हिस्से में एक भी नया बड़ा निवेश समझौता नहीं आया।

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दावोस में जिस टाटा स्टील के साथ पर्यावरण के अनुकूल ग्रीन समझौते को झारखंड सरकार उपलब्धि बताने की कोशिश कर रही है, वह कोई नया निवेश नहीं, बल्कि पहले से स्वीकृत और घोषित परियोजनाओं की री-पैकेजिंग मात्र है। झारखंड में टाटा स्टील का अधिकांश बड़ा निवेश पहले ही मंजूर और घोषित है। जमशेदपुर प्लांट का आधुनिकीकरण, खनन लीज और कैप्टिव माइंस, पूर्व में स्वीकृत विस्तार योजनाएं हैं। प्रतुल ने कहा कि दावोस में न तो किसी नई यूनिट की घोषणा हुई, न नई स्टील प्लांट क्षमता की, न किसी नए लोकेशन की जानकारी दी गई। सबसे गंभीर बात यह है कि एमओयू की राशि, समय-सीमा और संभावित रोजगार के आंकड़े तक सार्वजनिक नहीं किए गए, जो अपने-आप में कई सवाल खड़े करता है। यह साफ दिखाता है कि झारखंड सरकार के पास दावोस में दिखाने के लिए नया विजन नहीं, केवल पुरानी फाइलें और फोटो-ऑप थे।