महिला बंदियों की स्वास्थ्य समस्याएं चिंताजनक : राफिया

Dec 07, 2025 08:58 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रांची
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झारखंड में जेलों की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली पर प्रवक्ता राफिया नाज ने सरकार को घेरा। उन्होंने बताया कि जेलों में 16,549 से अधिक बंदी हैं, लेकिन नियमित नर्स की कमी है। महिला बंदियों को मासिक धर्म, प्रसव पूर्व देखभाल और दवाइयों की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद सरकार की उदासीनता जारी है।

महिला बंदियों की स्वास्थ्य समस्याएं चिंताजनक : राफिया

रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। झारखंड के जेलों में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बदहाली को लेकर प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी जेलों में चिकित्सा संसाधन बेहद कमजोर हैं, जिसका गंभीर असर सिर्फ पुरुष नहीं, बल्कि महिला बंदियों पर भी पड़ रहा है। उनके अनुसार, बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव सरकार की लापरवाही और संवेदनहीनता को उजागर करता है। राफिया नाज ने बताया कि राज्य के जेलों में वर्तमान में 16,549 से अधिक बंदी हैं, लेकिन इसके बावजूद किसी भी जेल में नियमित नर्स की तैनाती नहीं है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति न सिर्फ चिंताजनक है, बल्कि महिला बंदियों के लिए अत्यंत जोखिमपूर्ण भी है।

मासिक धर्म, प्रसव पूर्व देखभाल, दवाइयों की उपलब्धता और स्वच्छता सामग्री की जरूरत पूरी न होने से महिलाएं लगातार स्वास्थ्य संकट का सामना कर रही हैं। इसके अलावा, गर्भवती बंदियों के लिए नियमित जांच, ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग और आपातकालीन चिकित्सा सहायता की अनिवार्यता को भी नजरअंदाज किया जा रहा है। जिन महिला बंदियों के साथ नवजात शिशु रहते हैं, उनके लिए 24×7 स्वास्थ्य सुविधा का न होना स्थिति को और गंभीर बनाता है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि जेलों में सभी स्वास्थ्य पदों को तुरंत भरा जाए, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए हैं। हर बार किसी बंदी की मृत्यु के बाद एनएचआरसी द्वारा नोटिस जारी होने के बावजूद सरकार की उदासीनता बनी हुई है। राफिया नाज ने जानकारी दी कि जेल आईजी ने भी गृह विभाग को पत्र लिखकर नर्सों की प्रतिनियुक्ति की मांग की है और स्वीकार किया है कि नर्सों की कमी के कारण 24 घंटे इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही। उन्होंने सरकार से मांग की, कि सभी जेलों में तुरंत नर्सों व पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति की जाए, महिला बंदियों के लिए विशेष चिकित्सा इकाइयां स्थापित हों और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

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