नियमावली में लाइब्रेरियन पद शामिल नहीं होने पर संघ ने जताई चिंता
झारखंड इंफॉर्मेशन एंड लाइब्रेरी एसोसिएशन ने 9वीं से 12वीं की पढ़ाई के लिए नए नियमों का स्वागत किया, लेकिन पुस्तकालयाध्यक्ष के पद को शामिल न करने पर चिंता जताई। संघ ने सरकार से अपील की कि अंतिम मंजूरी से पहले ड्राफ्ट में आवश्यक संशोधन किए जाएं, ताकि आधुनिक शिक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाया जा सके।

रांची, वरीय संवाददाता। झारखंड इंफॉर्मेशन एंड लाइब्रेरी एसोसिएशन (जेआईएलए) ने 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई को एक ही कैंपस में संचालित करने के लिए तैयार नए नियमावली का स्वागत किया है। वहीं, इसमें पुस्तकालयाध्यक्ष (लाइब्रेरियन) के पद को शामिल नहीं किए जाने पर चिंता व्यक्त की है। संघ ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव से अपील की है कि कैबिनेट में अंतिम मंजूरी से पहले ड्राफ्ट में आवश्यक संशोधन किया जाए। इसमें पुस्तकालयाध्यक्षों की नियुक्ति का प्रावधान जोड़ा जाए, ताकि राज्य की आधुनिक और डिजिटल शिक्षा व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू किया जा सके। संघ ने कहा है कि ड्राफ्ट में जहां 200 छात्रों पर 11 शिक्षकों के पद का प्रावधान किया गया है और 750 अनिवार्य पुस्तकों के साथ पुस्तकालय स्थापित करने का स्पष्ट नियम बनाया गया है, वहीं पुस्तकालय के संचालन के लिए योग्य पुस्तकालयाध्यक्ष के पद का कोई उल्लेख नहीं किया गया है।संघ
के सचिव डॉ संजय कुमार कर्ण ने कहा कि सीबीएसई की संबद्धता नियमावली तथा एनसीईआरटी के स्थापित मानकों के अनुसार प्रत्येक माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालय में योग्य पुस्तकालयाध्य का पद अनिवार्य है। पुस्तकालय विभाग की जिम्मेदारी किसी अन्य विषय के शिक्षक पर नहीं छोड़ी जा सकती। इससे न केवल शिक्षण कार्य प्रभावित होगा, बल्कि पुस्तकालय में उपलब्ध डिजिटल और भौतिक संसाधनों का समुचित उपयोग भी सुनिश्चित नहीं हो सकेगा।
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