
हिन्दी साहित्य संस्कृति मंच की गोष्ठी में कविता पाठ
संक्षेप: झारखंड हिन्दी साहित्य संस्कृति मंच की ऑनलाइन मासिक काव्य गोष्ठी रविवार को आयोजित हुई। इसमें कई कवियों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत की, जिसमें पूनम वर्मा, सुनीता कुमारी, और गीता चौबे की कविताएँ शामिल थीं। गोष्ठी का समापन बिनोद सिंह गहरवार के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।
रांची, वरीय संवाददाता। झारखंड हिन्दी साहित्य संस्कृति मंच की ऑनलाइन मासिक काव्य गोष्ठी रविवार को हुई। पूनम वर्मा द्वारा संयोजित इस गोष्ठी की अध्यक्षता संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव ने की। संस्था के कोषाध्यक्ष कृष्णा विश्वकर्मा ‘बादल’ ने गोष्ठी में उपस्थित सभी कवियों-कवयित्रियों का स्वागत किया। काव्य गोष्ठी का आरंभ रेणुबाला धार द्वारा प्रस्तुत सुमधुर सरस्वती वंदना से हुआ। पूनम वर्मा की बाल कविता ‘समय का पहिया चलता जाय’ और ‘कितना प्यारा था वो बचपन’, सुनीता कुमारी की कविता ‘मन मेरा सावन भादो हो गया’, गीता चौबे ‘गूंज’ का गीत ‘नव पल्लव ने थाम जड़ों को जीवन संचार किया’, रेणुबाला धार की गजल ‘मेरे गम का उन्हें एहसास नहीं’, हिमकर श्याम की गजल ‘दर्द का रिश्ता भला ढोता है क्या’, गीता सिन्हा ‘गीतांजलि’ की कविता ‘ये खुला खुला नीला आकाश और पर्वतों की भुजाएं की प्रस्तुतियों ने मन मोह लिया।

इनके अलावा कई कवियों ने प्रस्तुतियां दी। कार्यक्रम का समापन बिनोद सिंह गहरवार के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।

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