
सहायक आचार्य नियुक्ति में दो वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम पर सुनवाई 17 फरवरी को
झारखंड उच्च न्यायालय में सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में दो वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम के छात्रों का चयन नहीं करने के मामले की सुनवाई 17 फरवरी को होगी। आयोग ने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अदालत ने निर्देश दिया कि दो वर्षीय बीएड डिग्रीधारी अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाए।
रांची, विशेष संवाददाता। सहायक आचार्य नियुक्ति (कक्षा छह से आठ) परीक्षा में दो वर्षीय बीएड कोर्स करने वालों का चयन नहीं करने के मामले में हाईकोर्ट में 17 फरवरी को सुनवाई होगी। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में सोमवार को सुनवाई के दौरान झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग की ओर से बताया गया कि इससे जुड़ा एक मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद ही इस पर सुनवाई होनी चाहिए। इसके बाद अदालत ने 17 फरवरी को सुनवाई निर्धारित की। इससे पूर्व मामले में सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने एकलपीठ में चल रहे अवमानना मामले में जेएसएससी के खिलाफ पीड़क कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था।
एकलपीठ में विप्लव दत्ता सहित अन्य की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश और वर्मा कमीशन की रिपोर्ट के बाद वर्ष 2014 में एनसीटीई की ओर से रेगुलेशन जारी किया गया था, जिसमें कहा गया था कि वर्ष 2014 के बाद बीएड का कोर्स दो वर्ष का होगा। इसके बाद एनसीटीई से संबद्ध देश की सभी संस्था, झारखंड के रांची विश्वविद्यालय सहित सभी विश्वविद्यालयों में बीएड की पढ़ाई दो साल की होती है। ऐसे में आयोग की ओर से दो साल बीएड करने वाले अभ्यर्थियों को चयन से बाहर करना गैरवाजिब है। दो वर्ष बीएड की डिग्री एनसीटीई गाइडलाइन के तहत वर्ष 2019 अधिसूचना जारी की गई थी। इसके बाद एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि दो वर्ष डिग्रीधारी अभ्यर्थियों को न्यूनतम योग्यता की शर्त के आधार पर चयन प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जा सकता है। अदालत ने नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल सभी वैसे अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया था, जिन्होंने दो वर्षीय बीएड का कोर्स किया है।

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