हाईकोर्ट ने कैट का आदेश रद्द किया, नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश
झारखंड हाईकोर्ट ने रेलवे भर्ती मामले में केंद्र सरकार और रेलवे भर्ती बोर्ड को झटका दिया है। कोर्ट ने कहा कि समान परिस्थितियों में अलग व्यवहार असंवैधानिक है। याचिकाकर्ता रविशंकर कुमार को 30 अप्रैल 2020 को सेवानिवृत्त होने के बावजूद भर्ती से वंचित करना भेदभावपूर्ण है। कोर्ट ने रेलवे को चार सप्ताह में नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया।

रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने रेलवे भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में केंद्र सरकार और रेलवे भर्ती बोर्ड को झटका देते हुए स्पष्ट किया है कि समान परिस्थितियों में अलग-अलग व्यवहार असंवैधानिक है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने इसके साथ ही केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के फैसले को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि समान परिस्थितियों में अन्य उम्मीदवारों को नियुक्ति दी गई है, जबकि याचिकाकर्ता को वंचित करना भेदभावपूर्ण और मनमाना है। कोर्ट ने कैट की पटना बेंच की रांची सर्किट बेंच की 23 अक्टूबर 2024 को पारित आदेश को निरस्त करते हुए रेलवे को निर्देश दिया कि चार सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को नियुक्ति पत्र जारी किया जाए।क्या
है मामलायाचिकाकर्ता रविशंकर कुमार, जिन्होंने भारतीय सेना में 16 वर्षों से अधिक सेवा दी है, ने रेलवे की नन टेक्निकल पॉपुलर कैटेगरी (एनटीपीसी ) भर्ती के तहत आवेदन किया था। नियमानुसार, उम्मीदवार का 31 मार्च 2020 तक सेना से सेवानिवृत्त होना आवश्यक था, जबकि याचिकाकर्ता 30 अप्रैल 2020 को सेवानिवृत्त हुए।दस्तावेज सत्यापन के दौरान रेलवे ने यह कहते हुए उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी कि वे निर्धारित कट-ऑफ तिथि तक सेवानिवृत्त नहीं हुए और आवेदन में गलत जानकारी दी है। कैट ने भी याचिकाकर्ता को राहत देने से इनकार करते हुए रेलवे के निर्णय को सही ठहराया था।सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने माना कि न्यायाधिकरण ने समानता के मुद्दे पर विचार नहीं किया, जो परवर्सिटी (स्पष्ट त्रुटि) की श्रेणी में आता है। अदालत ने कहा कि जब समान परिस्थितियों में अन्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई है, तो याचिकाकर्ता को इससे वंचित करना न्यायसंगत नहीं है।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


