अग्रिम जमानत के बाद भी युवक हिरासत में, एसएसपी और दो थाना प्रभारी तलब
झारखंड उच्च न्यायालय ने भाजपा नेता अनिल टाइगर हत्याकांड में अग्रिम जमानत मिलने के बावजूद एक युवक को अगवा कर अवैध हिरासत में रखने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने रांची के एसएसपी और थाना प्रभारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि बिना वारंट के उनके पुत्र को उठाया गया।

रांची, संवाददाता। भाजपा नेता अनिल टाइगर हत्याकांड में अग्रिम जमानत मिलने के बावजूद एक युवक को कथित रूप से अगवा कर अवैध रूप से हिरासत में रखने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस आर मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप श्रीवास्तव की खंडपीठ ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए रांची के एसएसपी, खूंटी थाना प्रभारी और कांके थाना प्रभारी को 14 जनवरी को दोपहर ढाई बजे तीनों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। यह मामला दमोदर नाथ शाहदेव द्वारा दायर रिट याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उनके पुत्र देवब्रत नाथ शाहदेव को कांके थाना कांड संख्या 90/2025 में अग्रिम जमानत मिलने और जमानत बांड भरने के बावजूद बिना किसी वारंट और कारण के पुलिस ने घर से उठा लिया और अवैध रूप से हिरासत में रखा।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि देवब्रत नाथ शाहदेव को 12 जनवरी की रात 11:05 बजे रिहा कर उनके परिचित अमित सिन्हा की सुपुर्दगी में दिया गया। इसके समर्थन में कांके थाना प्रभारी ने पीआर बॉन्ड भी प्रस्तुत किया। हालांकि, कोर्ट के समक्ष उस समय नया मोड़ आया जब याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता ने अमित सिन्हा से फोन पर बात की। स्पीकर पर हुई बातचीत में अमित सिन्हा ने बताया कि देवब्रत को 13 जनवरी की रात 2 बजे कांके थाना से खूंटी थाना ले जाया गया है, जहां वह पुलिस हिरासत में है। आरोप लगाया गया कि उनसे जबरन पीआर बॉन्ड पर हस्ताक्षर कराए गए।
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