
हाईकोर्ट का शिक्षकों को मैट्रिक प्रशिक्षित वेतनमान देने का निर्देश
संक्षेप: झारखंड हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि वह उन शिक्षकों को मैट्रिक प्रशिक्षित वेतनमान और लाभ चार सप्ताह में प्रदान करे। अदालत ने कहा कि सभी आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन कर लाभ का भुगतान सुनिश्चित करें। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी।
रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि वह उन शिक्षकों को मैट्रिक प्रशिक्षित वेतनमान और इसके सभी लाभ चार सप्ताह में प्रदान करे, जिन्हें अब तक मैट्रिक अप्रशिक्षित वेतनमान दिया जा रहा है। जस्टिस संजय प्रसाद की अदालत ने यह आदेश शिक्षिका द्रोपदी कुमारी एवं अन्य की अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया। इस मामले में कोर्ट के आदेशानुसार शिक्षा विभाग के सचिव उमा शंकर सिंह और माध्यमिक शिक्षा निदेशक राजेश प्रसाद को पिछली सुनवाई के अनुपालन में अदालत के समक्ष उपस्थित हुए थे। सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ रंजन ने अदालत को बताया कि विभाग हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के बावजूद शिक्षकों को प्रशिक्षित वेतनमान नहीं दे रहा है।

सत्यापन की प्रक्रिया चल रही : अपर महाधिवक्ता राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने बताया कि विभाग ने 7 दिसंबर 2024 को पारित आदेशों का पालन करने का निर्णय ले लिया है। उन्होंने कहा कि कुछ याचिकाकर्ताओं ने अब तक अपने पेंशन से जुड़ी आवश्यक जानकारी या पीपी नंबर नहीं दिया है, इसलिए सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है। कोर्ट ने कहा 4 सप्ताह में करें भुगतान अदालत ने कहा कि विभाग सभी आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन कर लाभ का भुगतान सुनिश्चित करें। साथ ही याचिकाकर्ताओं को भी विभागीय जांच में सहयोग करने और संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी के समक्ष उपस्थित होने को कहा गया है, ताकि आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा सके। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सभी स्वीकृत बकाया भुगतान चार सप्ताह के भीतर कर दिए जाएं। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी। अदालत ने सचिव और निदेशक की व्यक्तिगत उपस्थिति से फिलहाल छूट दे दी है।

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