
पेसा लागू नहीं हुआ तो सचिव को कोर्ट में सशरीर हाजिर होना होगा
13 जनवरी के पहले लागू करनी होगी नियमावली, सरकार को नियमावली लागू करने का अंतिम मौका
रांची। विशेष संवाददाता राज्य में 13 जनवरी तक पेसा नियमावली लागू नहीं होने पर पंचायती राज सचिव को हाईकोर्ट में सशरीर हाजिर होना होगा। हाईकोर्ट ने सरकार को नियमावली लागू करने का अंतिम मौका दिया है। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने कहा है कि यदि पेसा नियमावली लागू कर दी जाती है, तो पंचायती राज विभाग के सचिव को अदालत में सशरीर हाजिर होने की आवश्यकता नहीं होगी। नियमावली लागू नहीं होने की स्थिति में सचिव को 13 जनवरी को अदालत को समक्ष सशरीर उपस्थित रहना होगा। पिछली सुनवाई के दौरान सचिव की ओर से अदालत को यह कहते हुए समय की मांग की गयी थी कि नियमावली कैबिनेट भेज दी गयी है।
23 दिसंबर को कैबिनेट ने नियमावली को मंजूरी भी प्रदान कर दी है। अब पंचायती राज विभाग की ओर से नियमावली लागू करने की अधिसूचना जारी होने के बाद राज्य में नियावली लागू हो जाएगी और पेसा पूरी तरह प्रभावी होगा। बता दें कि पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 (पेसा कानून) केंद्र सरकार ने 1996 में लागू किया था। इसका उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों के अधिकारों और हितों की रक्षा करना है। एकीकृत बिहार से लेकर झारखंड गठन के बाद तक राज्य सरकार ने अब तक इस कानून के तहत नियमावली नहीं बनाई है। झारखंड सरकार ने वर्ष 2019 और 2023 में पेसा नियमावली का ड्राफ्ट तैयार किया था, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया। पेसा नियमावली के मामले पर झारखंड हाईकोर्ट ने 29 जुलाई 2024 को जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को दो माह के भीतर पेसा नियमावली अधिसूचित करने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि संविधान के 73वें संशोधन और पेसा कानून की भावना के अनुरूप नियमावली तैयार कर लागू की जाए। लेकिन नियमावली अधिसूचित नहीं की गई। इसके बाद आदिवासी बुद्धिजीवी मंच एवं अन्य द्वारा अवमानना याचिका दायर की गयी है। जिस पर हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 13 जनवरी को निर्धारित है।

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