बिना निबंधन अस्पताल चलाने पर रोक सुनिश्चित करे सरकार : हाईकोर्ट

Mar 16, 2026 09:32 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रांची
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क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट लागू करने के निर्देश, चार माह में मांगी अनुपालन रिपोर्ट, रांची निवासी रंजीव रंजन की जनहित याचिका का निपटारा करते हुए आदेश दिया

बिना निबंधन अस्पताल चलाने पर रोक सुनिश्चित करे सरकार : हाईकोर्ट

रांची, संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2010 को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि कानून का प्रावधान होने के बावजूद राज्य में इसका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने रांची निवासी रंजीव रंजन की जनहित याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य में कोई भी अस्पताल, नर्सिंग होम या क्लीनिक बिना पंजीकरण के संचालित नहीं होना चाहिए। हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य सेवा निदेशक को चार महीने के भीतर पूरे राज्य में कानून के क्रियान्वयन से संबंधित विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

याचिका रांची निवासी रंजीव रंजन ने अपने पिता की वर्ष 2017 में एक निजी अस्पताल में हुई मृत्यु के बाद दाखिल की थी। हालांकि अदालत ने व्यक्तिगत लापरवाही के आरोपों की जांच से इनकार करते हुए कहा कि इस तरह के विवाद संबंधित मंच पर उठाए जा सकते हैं।अस्पतालों का रजिस्टर अपडेट करने का निर्देशखंडपीठ ने राज्य क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट काउंसिल को निर्देश दिया कि राज्य में संचालित सभी अस्पतालों और क्लीनिकों का रजिस्टर तैयार कर उसे अद्यतन किया जाए। साथ ही हर महीने डिजिटल रिटर्न भेजकर राष्ट्रीय रजिस्टर को अपडेट किया जाए और नियमों के क्रियान्वयन पर वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित की जाए।जिला स्तर पर नियमित निरीक्षण जरूरीअदालत ने कहा कि जिला पंजीकरण प्राधिकरण प्रभावी तरीके से काम करे और अस्पतालों व क्लीनिकों का नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करे, ताकि कानून के प्रावधानों का पालन हो सके।फ्लाइंग स्क्वॉड बनाने का सुझावखंडपीठ ने राज्य सरकार को विशेषज्ञों का फ्लाइंग स्क्वॉड गठित करने पर विचार करने का सुझाव दिया, जो समय-समय पर क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट का निरीक्षण कर नियमों के अनुपालन की जांच करे।72 घंटे में देना होगा मेडिकल रिकॉर्डअदालत ने कहा कि अस्पताल और डॉक्टर मरीज या उनके अधिकृत परिजनों को अनुरोध के 72 घंटे के भीतर मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए बाध्य हैं। अधिकारियों को इस संबंध में सभी अस्पतालों को निर्देश जारी करने को कहा गया है।

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