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प्रमोशन की तिथि से वेतनमान नहीं देने पर हाईकोर्ट सख्त

प्रमोशन की तिथि से वेतनमान नहीं देने पर हाईकोर्ट सख्त

संक्षेप: पथ निर्माण सचिव को हाजिर होने का निर्देश, आदेश का अनुपालन नहीं करना अवमानना, पथ निर्माण विभाग ने 13 नवंबर 2019 को वरीयता सूची जारी की थी

Sat, 8 Nov 2025 06:36 PMNewswrap हिन्दुस्तान, रांची
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रांची। विशेष संवाददाता झारखंड हाईकोर्ट ने आदेश का पालन नहीं होने पर सख्त रुख अपनाते हुए पथ निर्माण विभाग के सचिव को 21 नवंबर को सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने कहा कि केवल प्रोन्नति देना पर्याप्त नहीं है, प्रार्थियों को उसी तिथि से वेतनमान देना होगा, जिस तिथि से वरीयता सूची में उनके कनीय अधिकारियों को प्रमोशन और वेतन मिला है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेश का अनुपालन नहीं करना अवमानना की श्रेणी में आता है। इस संबंध में विक्रम मंडल एवं अन्य ने याचिका दायर की है। प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता अमरेंद्र प्रधान ने दलील दी कि विभाग ने सिर्फ खानापूर्ति करते हुए प्रोन्नति दी है, लेकिन उस तिथि से वेतनमान नहीं दिया, जबसे उनके कनिष्ठों को लाभ मिला।

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यह न्यायालय के पूर्व आदेश की अवमानना है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि प्रार्थियों को जूनियर इंजीनियर से असिस्टेंट इंजीनियर पद पर प्रोन्नति दी जा चुकी है, परंतु उन्हें इस पद का वेतन योगदान की तिथि से ही मिलेगा। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पूर्व आदेश का सही तरीके से अनुपालन आवश्यक है। क्या है मामला यह विवाद जेई से एई पद पर प्रोन्नति से जुड़ा है। पथ निर्माण विभाग ने 13 नवंबर 2019 को वरीयता सूची जारी की थी, जिसमें प्रार्थी वरिष्ठ थे, लेकिन प्रमोशन उनके कनिष्ठों को दे दिया गया। जेपीएससी की डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी ने 14 मार्च 2023 को बैठक कर कनिष्ठों के प्रमोशन की अनुशंसा की थी। विभाग ने प्रार्थियों की संपत्ति विवरणी, सर्विस बुक और सीआर अपडेट नहीं होने का हवाला देकर 5 अप्रैल 2023 को उनके दावे को खारिज कर दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए प्रार्थियों ने हाईकोर्ट की एकल पीठ में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने 18 सितंबर 2023 को विभागीय आदेश रद्द करते हुए कहा था कि प्रार्थियों को उसी तिथि से एई पद पर प्रोन्नति दी जाए, जिस तिथि से उनके कनिष्ठों को दी गई, साथ ही सभी वित्तीय लाभ भी दिए जाएं।