
हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत और ट्रांजिट के दौरान मौतों की मांगी पूरी जानकारी
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पुलिस हिरासत या ट्रांजिट में हुई मौतों का पूरा ब्योरा दाखिल करने का आदेश दिया है। अदालत ने गृह विभाग के प्रधान सचिव द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र को असंतोषजनक बताया और तीन सप्ताह में नए शपथपत्र की मांग की। अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी।
रांची, संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने राज्य सरकार को पुलिस हिरासत या पुलिस ट्रांजिट के दौरान होने वाली मौतों के सभी मामलों का पूरा ब्योरा दाखिल करने का निर्देश दिया है। पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि गृह विभाग के प्रधान सचिव द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र में केवल जेल या न्यायिक हिरासत में होने वाली मौतों का ही डेटा शामिल है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस हिरासत या पुलिस ट्रांजिट में हुईं मौतों के मामले इस शपथ पत्र में शामिल नहीं थे, जबकि पिछले आदेश में सभी प्रकार की हिरासत में मौतों का ब्योरा मांगा गया था।
अदालत ने सरकार की ओर से दाखिल शपथ पत्र में दी गई जानकारी पर असंतोष जताया है। अदालत ने गृह विभाग के प्रधान सचिव को व्यक्तिगत रूप से तीन सप्ताह शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें पुलिस हिरासत और पुलिस ट्रांजिट में होने वाली मौतों के सभी मामलों का स्पष्ट ब्योरा उपलब्ध हो। मामले में अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी। इस संबंध में प्रार्थी मुमताज अंसारी एवं अन्य की ओर से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। अदालत ने 25 सितंबर को पुलिस हिरासत में मौतों का संपूर्ण डेटा मांगा था, जिसका जवाब अपर्याप्त पाए जाने पर फिर से शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश जारी किया है।

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