महिला विधायक के खिलाफ टिप्पणी करने वाले को जमानत देने से इनकार
झारखंड हाईकोर्ट ने महिला विधायक के खिलाफ फर्जी डिजिटल पहचान का उपयोग कर अपमानजनक टिप्पणियां करने के आरोपी सहदेव उरांव को जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार के साइबर हमले गंभीर हैं और महिला की गरिमा को नुकसान पहुँचाते हैं। मामला 2025 का है और आरोपी न्यायिक हिरासत में है।

रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने एक महिला विधायक के खिलाफ फर्जी डिजिटल पहचान का उपयोग कर अपमानजनक और जेंडर आधारित टिप्पणी करने के आरोपी सहदेव उरांव को जमानत देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस अनुभव रावत चौधरी की अदालत ने प्रार्थी की जमानत याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह कृत्य किसी व्यक्ति की गरिमा पर सीधा प्रहार है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि एक महिला जनप्रतिनिधि को निशाना बनाकर किए गए इस तरह के साइबर हमले न केवल गंभीर प्रकृति के हैं, बल्कि सामाजिक और व्यक्तिगत गरिमा के विरुद्ध भी हैं। कोर्ट ने कहा कि डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग कर किसी महिला की छवि धूमिल करने वाले आरोपी को जमानत पर रिहा करना उचित नहीं है।
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मामले के गवाहों को शीघ्र प्रस्तुत किया जाए, ताकि ट्रायल की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जा सके। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी को किसी दूसरी प्राथमिकी में जमानत मिली भी है, तो उसका इस वर्तमान मामले पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। आदेश की प्रति निदेशक अभियोजन और संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक को भेजने का निर्देश कोर्ट ने दिया।सहदेव उरांव 6 सितंबर 2025 से हिरासत मेंयह मामला रांची के साइबर थाने में वर्ष 2025 से संबंधित है। आरोपी सहदेव उरांव 6 सितंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में है। प्रार्थी के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया है। उनके पास से केवल एक मोबाइल और सिम कार्ड बरामद हुआ है और दर्ज की गई अधिकांश धाराएं जमानती हैं। राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध किया गया। केस डायरी का हवाला देते हुए सरकारी वकील ने कहा कि आरोपी ने जानबूझकर फर्जी डिजिटल पहचान बनाई ताकि महिला विधायक पर लैंगिक और अपमानजनक हमले किए जा सकें।
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