
26 साल पुराने जानलेवा हमले का सजायाफ्ता बरी
जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
रांची, संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 1999 के जानलेवा हमले को लेकर फायरिंग करने के मामले में सजायाफ्ता मदन मरांडी को बड़ी राहत देते हुए बरी करने का आदेश दिया है। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव और अभियोजन पक्ष की गंभीर कमियों के आधार पर आरोपी को संदेह का लाभ दिया तथा दुमका की निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी की ठोस पहचान और अपराध में उसकी संलिप्तता साबित करने में असफल रहा है। जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
बता दें कि दुमका कोर्ट ने आरोपी मदन मरांडी को जानलेवा हमले में दोषी पाकर 10 साल और अवैध हथियार रखने के आरोप में दो साल कैद की सजा सुनाई थी। इस आदेश को चुनौती देते हुए 18 सितंबर 2003 को हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी। क्या था मामला अभियोजन के अनुसार, 16 अगस्त 1999 की रात करीब 11 बजे सूचक सुनीलाल हांसदा पर उस समय गोली चलाई गई थी, जब वह अपने घर में सो रहा था। आरोप था कि मदन मरांडी ने उसके कनपटी के पास गोली चलाई और शोर मचाने पर फरार हो गया। इस घटना के पीछे दो वर्ष पूर्व एक शादी समारोह में हुए विवाद को कारण बताया गया था।

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