मातृ मृत्यु दर को शून्य के करीब लाना हमारा संकल्प : डॉ अंसारी

Newswrap हिन्दुस्तान, रांची
share

राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस के अवसर पर कार्यक्रम, एनीमिया नियंत्रण जैसे पहलुओं पर सरकार का विशेष ध्यान

मातृ मृत्यु दर को शून्य के करीब लाना हमारा संकल्प : डॉ अंसारी

रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी महिला को जीवन देते समय अपना जीवन नहीं खोना चाहिए। राज्य में मातृ मृत्यु दर को शून्य के करीब लाना ही सरकार का लक्ष्य है। राज्य में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, आर्थिक सहयोग और जन-जागरुकता पर विशेष बल दिया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री शनिवार को एक होटल में राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि स्वस्थ सुरक्षित मातृत्व और स्वस्थ शिशु जन्म को बढ़ावा देने के लिए राज्य में किशोरियों की शिक्षा, 18 वर्ष के बाद विवाह सुनिश्चित करना और एनीमिया नियंत्रण जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कुपोषण, सिकल सेल एनीमिया, थैलेसीमिया और एनीमिया जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए व्यापक स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। यूनीसेफ के सहयोग से ग्राम स्तर तक पहुंच और व्यवहार परिवर्तन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान उच्च जोखिम गर्भावस्था की पहचान एवं गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल से संबंधित एक मॉड्यूल का भी शुभारंभ किया गया।तीसरे से पहले स्थान तक पहुंचना हमारा लक्ष्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में झारखंड स्वास्थ्य सेवाओं में देश में तीसरे स्थान पर है, लेकिन सरकार का लक्ष्य इसे पहले स्थान पर पहुंचाना है। डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 42 हजार सहिया कार्यकर्ताओं को एक माह के भीतर टैब उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे वे तकनीकी रूप से सशक्त होकर गांव-गांव में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दे सकें।स्वास्थ्य सूचकांक ही वास्तविक विकास का पैमानाराष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि किसी भी राज्य के वास्तविक विकास का आकलन उसके बुनियादी ढांचे से नहीं, बल्कि मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) और शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) जैसे स्वास्थ्य सूचकों से किया जाता है। झारखंड की स्थिति बेहतर हुई है, लेकिन वैश्विक मानकों तक पहुंचने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में डॉ पुष्पा, स्टेट नोडल ऑफिसर (मातृ स्वास्थ्य) ने बताया कि राज्य में उच्च जोखिम गर्भावस्था (एचआरपी) की समयबद्ध पहचान और प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यूनीसेफ की पारुल शर्मा ने कहा कि झारखंड मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक उभरता हुआ मॉडल बन रहा है। मातृत्व कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक नए जीवन की शुरुआत है। इसलिए एक भी मातृ मृत्यु स्वीकार्य नहीं है।

Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।