210 करोड़ से लगेंगे 7929 नए चापाकल, 14,246 की मरम्मत और रखरखाव
आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य सरकार ने शुद्ध पेयजल एवं स्वच्छता पर किया फोकस, चालू वित्तीय वर्ष में विभाग ने अब तक 13,410 चापाकलों को लगाया, कु

रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। भीषण गर्मी की आहट और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की किल्लत को देखते हुए राज्य सरकार विभिन्न जिलों में 7,929 नए चापाकल लगाएगी। इसके अलावा मौजूदा बुनियादी ढांचे को दुरुस्त रखने के लिए 14,246 पुराने चापाकलों की मरम्मत और रखरखाव का भी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने 210 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया है। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग ने अब तक 13,410 चापाकलों को लगाया है, जो कि कुल वार्षिक लक्ष्य (21,339) का लगभग 63 प्रतिशत है। शेष कार्य को गति देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि गर्मी आने से पहले ग्रामीणों को राहत मिल सके।
विभाग के आउटकम बजट 2026-27 के मुताबिक, ग्रामीण विकास और जन स्वास्थ्य को केंद्र में रखते हुए सरकार ने ‘शुद्ध पेयजल एवं स्वच्छता’ क्षेत्र के लिए खजाना खोल दिया है। इस बजट का मुख्य आकर्षण राज्य के ग्रामीण इलाकों में जल संकट को दूर करने के लिए चापाकलों का वृहद जाल बिछाना और पुरानी पाइपलाइन योजनाओं को विस्तार देना है। ....................... ग्रामीण पाइप वाटर सप्लाई स्कीम के तहत 14 लाख घरों तक पहुंचेगा जल राज्य सरकार का जोर केवल चापाकलों तक ही सीमित नहीं है। ग्रामीण पाइप वाटर सप्लाई स्कीम के तहत एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में ग्रामीण पाइप वाटर सप्लाई स्कीम के तहत 14.02 लाख घरों तक शुद्ध जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 190.50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को मीलों पैदल चलकर पानी लाने की मजबूरी से मुक्ति दिलाना और हर घर को शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। .................... स्वच्छता और कचरा प्रबंधन पर 600 करोड़ का निवेश पेयजल के साथ-साथ ‘स्वच्छ भारत’ अभियान के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए सरकार ने भारी निवेश का फैसला किया है। स्वच्छता के क्षेत्र में 600 करोड़ रुपये की बड़ी राशि आवंटित की गई है। इस बजट से 5.57 लाख व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण किया जाएगा। 2.30 लाख इकाइयों के माध्यम से ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन का लक्ष्य रखा गया है। यह कदम न केवल गांवों को ‘ओडीएफ प्लस’ की श्रेणी में लाएगा, बल्कि ग्रामीण स्वच्छता की गुणवत्ता में भी सुधार करेगा। ............................... बजट सत्र के दौरान भी चापाकल का उठा मुद्दा, अध्यक्ष ने भी जताई थी चिंता बता दें कि पिछले दिनों चल रहे बजट सत्र के दौरान जल संकट का मुद्दा भी उठा था। स्वयं विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने आगामी गर्मी के मौसम को देखते हुए राज्य में चापाकलों की खराब स्थिति और बंद पड़ी जलापूर्ति योजनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। सदन में उठी इन आवाजों को देखते हुए सरकार ने बजट में चापाकलों की मरम्मत और नई बोरिंग के लिए आवंटन को प्राथमिकता दी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में भारी निवेश और स्पष्ट लक्ष्यों के साथ उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले वर्षों में झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट की समस्या काफी हद तक कम हो सकेगी।
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