एबीसी से डिजिटल होंगे छात्र, प्रमाणपत्रों का सत्यापन होगा आसान
रांची विश्वविद्यालय में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा नैशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी (नैड) और एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) पर जागरुकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में एबीसी प्रणाली का क्रियान्वयन और विद्यार्थियों को डिजिटल शैक्षणिक ढांचे से जोड़ना था।

रांची, विशेष संवाददाता। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, झारखंड सरकार के तत्वावधान में बुधवार को रांची विश्वविद्यालय में नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी (नैड) और एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) पर एक दिवसीय जागरुकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में एबीसी प्रणाली के क्रियान्वयन को गति प्रदान करना और विद्यार्थियों को आधुनिक डिजिटल शैक्षणिक ढांचे से जोड़ना था। कार्यशाला में विभाग के निदेशक सुधीर बाड़ा, उपनिदेशक अजय राज खलखो और तकनीकी टीम विशेष रूप से उपस्थित रही। वहीं, रांची विश्वविद्यालय की ओर से डीएसडब्ल्यू प्रो. सुदेश कुमार साहू, सीसीडीसी डॉ. पीके झा, परीक्षा नियंत्रक प्रो. संजय कुमार सिंह और एबीसी की नोडल अधिकारी डॉ. दिपाली डुंगडुंग ने भागीदारी की।
इसमें छोटानागपुर प्रमंडल के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। दो सत्रों में दी गई जानकारी कार्यक्रम दो महत्वपूर्ण सत्रों में संपन्न हुआ। उद्घाटन सत्र में एबीसी और डिजिलॉकर की कार्यप्रणाली, इसके महत्व और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के तहत इसकी उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। तकनीकी सत्र के दौरान रिसोर्स पर्सन रवि पांडेय ने विद्यार्थियों के एबीसी अकाउंट बनाने, क्रेडिट अपलोड करने और तकनीकी बाधाओं को दूर करने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। क्रेडिट होंगे सुरक्षित, प्रमाणपत्रों का सत्यापन होगा आसान निदेशक सुधीर बाड़ा ने कहा कि संस्थानों में एबीसी अकाउंट बनाने की प्रक्रिया जारी है, लेकिन इसमें और तेजी लाने की आवश्यकता है। उन्होंने जानकारी दी कि हर कॉलेज में स्थापित स्टूडेंट रिसोर्स सेंटर विद्यार्थियों को अकाउंट खोलने में मदद कर रहे हैं। एबीसी के माध्यम से छात्रों के सभी शैक्षणिक क्रेडिट डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेंगे और डिजिलॉकर के जरिए प्रमाणपत्र देश-विदेश में कहीं भी आसानी से साझा किए जा सकेंगे। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. संजय कुमार सिंह ने बताया कि रांची विश्वविद्यालय इस दिशा में तेजी से कार्य कर रहा है। कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों की विभिन्न शंकाओं का समाधान किया गया।
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