झारखंड के हित में काम करें बैंक, नहीं तो लेना होगा कड़ा एक्शन : वित्त मंत्री
राधाकृष्ण किशोर बोले : राज्य में संचालित बैंकों को पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करना होगा, बैंकों का सीडी रेशियो जिस अनुपात में बढ़ना चाहिए, उस अ

रांची, संवाददाता। बैंकों को राज्य के हित में काम करना ही होगा। इस पर वित्त विभाग सख्त है। जिन बैंकों की भागीदारी सामाजिक योजनाओं में कमजोर रहेगी, उन्हें भविष्य में सरकारी निधियों से वंचित किया जा सकता है। साथ ही बैंक सीएसआर फंड की जानकारी भी साझा करें। ये बातें मंगलवार को प्रोजेक्ट भवन सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की 92वीं बैठक में बतौर मुख्य अतिथि वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कही। उन्होंने कहा कि बैंक अपनी आमदनी का कितना हिस्सा सीएसआर फंड में दे रहे हैं और वह राशि कहां खर्च हो रही है, इसकी जानकारी वित्त विभाग के पास नहीं है।
उन्होंने सीएसआर फंड उपयोग के कई उदाहरण देते हुए कहा कि झारखंड के कई बैंकों द्वारा सीएसआर फंड का उपयोग अपेक्षित उद्देश्यों से हटकर किया गया है, जो उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में संचालित बैंकों को पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करना होगा, ताकि राज्य के सामाजिक व आर्थिक विकास में उनकी भूमिका और प्रभावी हो सके। वित्त मंत्री ने आगे कहा कि बैंकों का सीडी रेशियो ( ऋण जमा अनुपात) बढ़ जरूर रहा है, लेकिन उस अनुपात में नहीं जिस अनुपात में इसे बढ़ना चाहिए। राज्य का वर्तमान सीडी रेशिया नेशलन सीडी रेशिया 77.78% से काफी कम है। उन्होंने कहा कि यदि इस दर से वृद्दि हुई तो राष्ट्रीय औसत तक पहुंचने में 15 साल लग जाएंगे। बता दें कि झारखंड में बैंकों का सीडी रेशिया जून-2025 तिमाही में 51.32% तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.54% की वृद्धि को दर्शाता है। मंत्री ने वित्तीय समावेशन और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बैंकों द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना भी की। अंडर फाइनेंसिंग एक बड़ी समस्या : शिल्पी नेहा बैठक में मौजूद कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने केसीसी ऋण पर कहा कि अंडर फाइनेंसिंग एक बड़ी समस्या है। जब तक किसानों को जितनी राशि चाहिए वह नहीं मिलेगी, एनपीए की समस्या बनी रहेगी। उन्होंने आगे कहा कि इस साल केसीसी के तहत 25 लाख ऋण का लक्ष्य था, वहीं अब तक 13 लाख खातों को केसीसी ऋण दिया गया है। बैंकों को निर्देश दिया गया है कि केसीसी लोन के लिए आवेदनों को जल्द से जल्द ऋण दें। साथ ही बैंकों से गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना के तहत फाइनेंसिंग में जो परेशानी हो रही है, उस पर भी फीडबैक मांगा गया है, ताकि सरकार के स्तर पर इसमें जरूरी सुधार किया जा सके। रि-केवाईसी के लिए सघन अभियान चलाने का बैंकों को निर्देश नाबार्ड क्षेत्रीय कार्यालय झारखंड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने बैंकों से आग्रह किया कि वे कृषि ऋण विशेषकर पशुपालन एवं मत्स्य पालन के क्षेत्र में, राज्य के संबंधित विभागों के साथ सुदृढ़ समन्वय स्थापित करें, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की आमदनी में वृद्धि हो सके। उन्होंने राज्य में लैम्प्स/पैक्स की आवश्यकता पर भी बल दिया। आरबीआई के क्षेत्रीय निदेशक प्रेम रंजन प्रसाद सिंह ने बताया कि वित्तीय साक्षरता केंद्रों (सीएफएल) की ओर से वित्तीय वर्ष 2024-25 में दिसंबर 2024 तिमाही तक कुल 10531 वित्तीय साक्षरता कैंप लगाए गये हैं। जिसके लिए आरबीआई द्वारा कुल ₹3.25 करोड़ की वित्तीय सहायता राशि बैंक ऑफ इंडिया व इंडियन बैंक को प्रदान की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले वर्ष नवंबर 2024 से पूरे प्रदेश में पुनः केवाईसी का सघन अभियान चलाने के लिए सभी बैंकों को आरबीआई की ओर से निर्देश दिया गया है। जेएसएलपीएस की मुख्य कार्यपालक अधिकारी अनन्या मित्तल ने बताया कि बैंकों की सक्रिय भागीदारी से समूहों को ऋण, वित्तीय सेवाओं और प्रशिक्षण तक बेहतर पहुंच मिल रही है, जिससे उनकी आय और अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। गुरुजी क्रेडिट योजना में सुधार कर इसे अधिक प्रभावी बनाने का निर्देश वित्त मंत्री ने बैंकों से कहा कि वे केंद्र व राज्य सरकार की प्रमुख फ्लैगशिप योजनाओं के तहत वित्तपोषण पर विशेष ध्यान दें, ताकि समाज के कमजोर और वंचित वर्गों तक ऋण और वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ सके। उन्होंने विशेष रूप से गुरुजी क्रेडिट योजना में सुधार कर इसे अधिक प्रभावी बनाने का निर्देश दिया और कहा कि इस प्रक्रिया में जहां भी सरकार की मदद की आवश्यकता हो, उसे उपलब्ध कराया जाएगा। एसएलबीसी की रिपोर्ट के मुख्य बिंदु - 30 जून 2025 तक राज्य का ऋण जमा अनुपात 51.32% रहा, जो वर्ष-दर-वर्ष 3.54% की वृद्धि को दर्शाता है। - राज्य में साल दर साल कुल जमा राशि में 29,279.34 करोड़ की वृद्धि हुई और कुल ऋण में भी 15,682.84 करोड़ की वृद्धि हुई। - कृषि क्षेत्र में वर्ष 2025-26 के 35,822 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले, जून 2025 तिमाही तक राज्य की कुल उपलब्धि 4,411 करोड़ रही, जो कुल लक्ष्य का 12.31% है। - एमएसएमई में वर्ष 2025-26 के 40,000 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले जून 2025 तिमाही तक राज्य की कुल उपलब्धि 22,675 करोड़ रही, जो कुल लक्ष्य का 56.69% है। - झारखंड में बैंकों ने प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत कुल 1.97 करोड़ खाते 30 जून तक खोले हैं।
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