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22 अक्तूबर, 2020|12:04|IST

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देश भर में फंसे छात्रों और मजदूरों को वापस लाने के लिए झारखंड के पास पर्याप्त संसाधन नहीं : मुख्यमंत्री

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गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बीच शनिवार को कोरोना संक्रमण और लॉक डाउन पर बात हुई। मुख्यमंत्री ने राज्य की समस्या से उन्हें अवगत कराते हुए बताया है कि देश भर में फंसे अपने छात्रों और मजदूरों को वापस लाने के लिए झारखंड के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। इस दिशा में झारखंड को केंद्र सरकार से सकारात्मक पहल की उम्मीद है। सीएम ने कहा कि गृह मंत्रालय की तरफ से जैसा गाइडलाइन मिलेगा झारखंड सरकार उसी हिसाब से काम करेगी। सीएम ने टीवी मीडिया से हुई बातचीत का वीडियो रि-ट्वीट किया है।

झारखंड के सामने डबल डिजास्टरमुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के सामने आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य तीनों मोर्चों पर कई चुनौतियां खड़ी हैं। झारखंड की करीब 80 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र में रहती है। अब तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब आठ लाख लोग लॉक डाउन खुलने के बाद झारखंड लौटेंगे। ये लोग ग्रामीण क्षेत्रों में ही कूच करेंगे। ऐसे में संक्रमण का खतरा और बढ़ेगा। सीएम ने कहा कि विलंब से मेडिकल संसाधन उपलब्ध होने के कारण जांच में देरी हुई है। यह स्थिति झारखंड के लिए डबल डिजास्टर जैसा है। लॉक डाउन पर पीएम के फैसले के साथमुख्यमंत्री ने कहा कि सोमवार को पीएम से राज्यों के सीएम की बात होनी है। इस दौरान पीएम को झारखंड की स्थिति से अवगत कराया जाएगा। ऐसा संकेत लग रहा है कि तीन तारीख के बाद धीरे-धीरे लॉक डाउन खुलेगा। लॉक डाउन खुलने पर झारखंड की समस्या और बढ़ेगी। कोटा समेत कई राज्यों में छात्र भी फंसे हुए हैं। जब सभी लौटेंगे तब भोजन, रहने और कॉरन्टाइन, स्वास्थ्य जांच से लेकर रोजगार की व्यवस्था करनी होगी। यह बड़ी चुनौती होगी। इन सभी स्थिति से पीएम को अवगत कराया जाएगा। सीएम हेमंत ने कहा है कि वह लॉक डाउन पर पीएम मोदी के निर्णय के साथ हैं। दलदल में फंस चुके हैंसीएम ने कहा कि हम दलदल में फंस चुके हैं। अब दलदल से निकलने का रास्ता ढूंढना है। यह समय गुत्थम-गुत्थी का नहीं है। इस समय केंद्र और राज्यों की सरकारों को एक दूसरे की मदद करनी होगी। जब हमारे यहां कोई संक्रमित नहीं था तब हम बहुत खुश थे। लेकिन जिस तरह से हमारे यहां रफ्तार बढ़ रही है अब डर यह है कि कहीं और यह संख्या ना बढ़े। सीएम ने कहा कि लॉक डाउन लगने से पहले एक दो दिन का ग्रे एरिया रहता तो दूसरे राज्यों में फंसे छात्रों और लोगों को लौटने का समय मिल जाता। तब हमें सिर्फ स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर ही लड़ना पड़ता। झारखंड 90 फीसदी केंद्र पर निर्भरझारखंड सरकार केंद्र पर निर्भर है। जीएसटी ने राज्य की कमर तोड़ दी है। मनरेगा की मजदूरी तक राज्य सरकार तय नहीं कर सकती। झारखंड पिछड़ा राज्य है फिर भी यहां मनरेगा मजदूरी 194 रुपये निर्धारित है जबकि कई राज्यों में यह तीन सौ से साढ़े तीन सौ रुपये तय किया गया है। दूसरे राज्यों में झारखंड के मजदूर हजार रुपये दैनिक कमा तेले हैं उन्हें झारखंड लौटने पर मनरेगा में काम देने से नया संकट खड़ा होगा। ग्रामीण क्षेत्र की इकोनामिक को पटरी पर लाने की कोशिश चल रही है। झारखंड में नक्सल गतिविधि भी है। इन सभी को ध्यान में रखना होगा।

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  • Web Title:Jharkhand does not have enough resources to bring back stranded students and laborers across the country Chief Minister