
बाबूलाल मरांडी का आरोप झूठ का पुलिंदा : कांग्रेस
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता लाल किशोर नाथ शाहदेव ने भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के आरोपों को झूठा और राजनीतिक हताशा बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने जनता को धोखा दिया और अवैध खनन के मुद्दे पर पूर्व सरकार की भूमिका को उजागर किया। हेमंत सरकार ने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है।
रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता लाल किशोर नाथ शाहदेव ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी की ओर से हेमंत सरकार के खिलाफ जारी किए गए आरोप पत्र और ठगुआ सरकार वाले बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने बाबूलाल मरांडी के आरोपों को झूठ का पुलिंदा और राजनीतिक हताशा का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि बाबूलाल मरांडी जिस बर्बादी के 6 साल की बात कर रहे हैं, उस बर्बादी की नींव असल में उनकी ही पार्टी (भाजपा) के पिछले शासन में रखी गई थी। आरोप पत्र जारी करने से पहले बाबूलाल मरांडी को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।
उनकी पार्टी ने केंद्र और राज्य दोनों जगह लंबे समय तक शासन किया, लेकिन जनता को केवल धोखा ही दिया। उन्होंने कहा कि बाबूलाल मरांडी पुलिस पर रक्षक ही भक्षक बनने का जो आरोप लगा रहे हैं, वह बेबुनियाद है। अवैध खनन की जड़ें रघुवर दास की पिछली सरकार में कितनी गहरी थीं, यह किसी से छिपा नहीं है। हेमंत सरकार ने पहली बार अवैध खनन के खिलाफ सख्ती दिखाई है और कई भ्रष्टाचारियों को जेल भेजा है, भले ही वे कितने भी बड़े क्यों न हों। भाजपा की बेचैनी इसी सख्ती का परिणाम है। उन्होंने कहा कि बाबूलाल मरांडी ने जिन सात गारंटियों पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है, उनमें से कई पर सरकार ने काम किया है और कई पर गंभीर प्रयास किए हैं। भाजपा को यह भी याद रखना चाहिए की जनता ने सरकार को पांच वर्षों के लिए चुना है। उन्होंने कहा कि नियोजन नीति का मामला भाजपा की पिछली सरकारों की जटिलताओं के कारण ही बार-बार कोर्ट में फंसता रहा है। हमारी सरकार ने खतियान आधारित नीति बनाने के लिए पूरी ईमानदारी से प्रयास किया है, लेकिन हर बार भाजपा समर्थित ताकतों ने कानूनी अड़चनें पैदा की हैं। इसी तरह से ओबीसी आरक्षण के बिना चुनाव कराने की मजबूरी भी अदालती फैसलों के कारण आई थी, लेकिन सरकार ओबीसी वर्ग के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि बाबूलाल मरांडी केवल 8,800 नियुक्ति पत्रों का मजाक उड़ा रहे हैं, जबकि यह एक निरंतर प्रक्रिया का हिस्सा है। हेमंत सरकार ने रिकॉर्ड समय में 16,000 से अधिक सरकारी और हजारों निजी नौकरियां दी हैं।

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