लोकतंत्र को केवल चुनाव तक सीमित न करें : ज्यां द्रेज
रांची में झारखंड जनाधिकार महासभा का सम्मेलन शुरू हुआ। यह सम्मेलन वीर सेनानियों को श्रद्धांजलि देकर प्रारंभ हुआ। वक्ताओं ने आदिवासी अधिकार, लोकतंत्र, और विस्थापन जैसे मुद्दों पर विचार किए। अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने असमानता और कॉरपोरेट नियंत्रण पर चर्चा की। सम्मेलन में विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शिक्षा और दलित समुदाय के मुद्दों पर भी बात की।

रांची। प्रमुख संवाददाता झारखंड जनाधिकार महासभा की ओर से सोमवार को बोकारो के ललपनियां लुगू बुरु घंटाबाड़ी धोरोम गढ़ में दो दिनी सम्मेलन आरंभ हुआ। समाजिक कार्यकर्ता व जन संगठन के साझा मंच की ओर से आयोजित सम्मेलन की शुरुआत वीर सेनानियों को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के साथ हुई। समिति अध्यक्ष बाबली सोरेन ने कहा कि लोग सदियों से अपनी परंपरा, भाषा और संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए हुए हैं। दिनेश मुर्मू ने लुगू बुरु के इतिहास पर प्रकाश डाला। संगठन के पूर्व विधायक विनोद सिंह, दयामनी बरला, नीतिशा खलखो और मनोज भुइयां व अन्य वक्ताओं ने वर्तमान हालात पर विचार रखे।अर्थशास्त्री
ज्यां द्रेज ने लोकतंत्र को केवल चुनाव तक सीमित न मानते हुए इसके व्यापक अर्थ पर जोर दिया और बढ़ती असमानता तथा कॉरपोरेट नियंत्रण पर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी सदियों से लोकतांत्रिक रहे हैं और उन्होंने अपनी जमीन, अधिकार और आजादी के लिए लगातार संघर्ष किया है। दयामनी बरला ने झारखंड में बढ़ते विस्थापन और कॉरपोरेट कब्ज़े पर गंभीर चिंता जताई। मनोज भुइयां ने कहा कि राज्य में दलित और आदिवासी समुदाय आर्थिक और मानसिक शोषण के शिकार हैं, जबकि अनुसूचित जाति आयोग का गठन अब तक नहीं हुआ और छात्रों को छात्रवृत्ति भी नहीं मिल रही है। नीतिशा खलखो ने कहा कि शिक्षा संस्थानों में नई शिक्षा नीति के माध्यम से मनुवादी सोच को बढ़ावा दिया जा रहा है। सम्मेलन में प्रवीर पीटर, अम्बिका यादव, संजू, मीणा मुर्मू, रमेश जेराई, अशोक पल ने भी अपने विचार रखे।
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