माता जानकी नारी शक्ति का सर्वोच्च प्रतीक: डॉ. महुआ माजी
झारखंड मैथिली मंच के तत्वावधान में महाकवि विद्यापति की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ तीन दिवसीय विद्यापति स्मृति पर्व समारोह का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर वैचारिक और साहित्यिक समागम का आयोजन किया गया, जिसमें महिला सशक्तीकरण और मैथिली नाट्य कला पर चर्चा की गई। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हरमू मैदान में किया जाएगा।

रांची, वरीय संवाददाता। झारखंड मैथिली मंच के तत्वावधान में शुक्रवार को महाकवि विद्यापति की प्रतिमा पर श्रद्धापूर्वक माल्यार्पण के साथ तीन दिवसीय विद्यापति स्मृति पर्व समारोह का शुभारंभ हुआ। हरमू स्थित विद्यापति दलान से पैदल मार्च करते हुए समाज के लोग मेन रोड पहुंचे, जहां महाकवि की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया गया। इसके पश्चात विद्यापति दलान में वैचारिक और साहित्यिक समागम हुआ, जो तीन प्रमुख सत्रों-उद्घाटन, साहित्यिक परिचर्चा और कवि गोष्ठी में संपन्न हुआ। समारोह का विधिवत उद्घाटन विद्यानाथ झा विदित, डॉ. परवेज हसन और प्रमोद कुमार झा सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने किया। इस अवसर पर मंच के अध्यक्ष विनय कुमार झा, महासचिव जयंत कुमार झा और अरुण कुमार झा विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत मिथिला की समृद्ध परंपरा के अनुसार भगवती वंदना और राष्ट्रगान के साथ हुई। उद्घाटनकर्ता डॉ. परवेज हसन ने माता जानकी के शक्ति, शौर्य, धैर्य और मर्यादित जीवन के अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए उन्हें नारी शक्ति का सर्वोच्च प्रतीक बताया।साहित्यिक परिचर्चा के दौरान बोकारो से आईं शैलजा झा ने महिला सशक्तीकरण पर अपने विचार रखे, वहीं शंभूनाथ झा ने मैथिली नाट्य कला के गौरवशाली इतिहास की चर्चा की। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. महुआ माजी ने माता जानकी की प्रासंगिकता पर बल देते हुए कहा कि उनका चरित्र आज भी समाज के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने बांग्ला और मैथिली संस्कृति की समानता का उल्लेख करते हुए बताया कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की रचनाओं पर भी महाकवि विद्यापति का गहरा प्रभाव स्पष्ट झलकता है। चर्चा को आगे बढ़ाते हुए हितनाथ झा ने मिथिला के उच्चैठ और उज्जैन के ऐतिहासिक संबंधों की जानकारी दी, जबकि डॉ. नरेंद्र झा और विद्यानाथ झा विदित ने वैशाख मास में माता जानकी के प्राकट्य के आध्यात्मिक महत्व को प्रतिपादित किया।द्वितीय सत्र में आयोजित कवि गोष्ठी की अध्यक्षता सियाराम झा सरस ने की, जबकि संचालन बद्रीनाथ झा ने किया। नंद किशोर महतो ने अतिथियों का स्वागत किया। काव्य पाठ की शुरुआत अंजू झा ने नारी समर्पण पर आधारित पंक्तियों से की। डॉ. आकांक्षा चौधरी ने माता सीता द्वारा शिव धनुष उठाने के प्रसंग को कविताबद्ध किया। मधु रानी, जयंती मिश्र और अन्य कवियों ने जीवन दर्शन से लेकर आधुनिक वैश्विक स्थितियों का सटीक चित्रण अपनी रचनाओं में किया। काव्य गोष्ठी में पटना से आए उमेश मिश्र, जम्मू के कमलेश भट्ट, रेणु झा, पूनम वर्मा, सरोज झा, कविता झा, रुणा रश्मि सहित अनेक विद्वानों ने अपनी काव्य पंक्तियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।समारोह के लिए सजा हरमू मैदान, सांस्कृतिक कार्यक्रम आज सेस्मृति पर्व के अगले दो दिनों के लिए हरमू मैदान में भव्य पंडाल सजकर तैयार है। शनिवार और रविवार को यहां भक्ति संगीत, महाकवि के नचारी गीतों और पारंपरिक नृत्य की रंगारंग प्रस्तुतियां होंगी। शनिवार संध्या सात बजे उद्घाटन सत्र के उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू होगा, जिसका समापन 12 अप्रैल रविवार को भक्ति रस और मैथिली लोकगीतों के साथ होगा।
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